
Petrol Diesel Price Hike: आम आदमी की जेब पर महंगाई का एक और बोझ बढ़ गया है। रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भी भारी इजाफा कर दिया है। शुक्रवार सुबह जारी नई दरों के मुताबिक, देशभर में ईंधन की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस बदलाव के बाद कई शहरों में पेट्रोल का भाव 100 रुपये के पार निकल गया है। करीब 4 साल के लंबे अंतराल के बाद खुदरा कीमतों में इतना बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिससे आम जनता के बजट पर सीधा असर पड़ने वाला है।
कितनी बढ़ी कीमतें: पेट्रोल और डीजल का नया रेट कार्ड
पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल की कीमतों में ₹3.14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, डीजल के दाम ₹3.11 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों के दबाव में यह फैसला लिया गया है। नई दरें शुक्रवार रात से ही प्रभावी हो चुकी हैं।
ईंधन की कीमतों में हुए बदलाव को आप नीचे दी गई तालिका से समझ सकते हैं:
| ईंधन का प्रकार | बढ़ोतरी (प्रति लीटर) | वर्तमान स्थिति |
| पेट्रोल | ₹3.14 | कई शहरों में ₹100 के पार |
| डीजल | ₹3.11 | माल ढुलाई और खेती होगी महंगी |
| प्रभावी समय | शुक्रवार रात | देशभर में लागू |
तेल कंपनियों का घाटा और पेट्रोलियम मंत्री का इशारा
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में संकेत दिए थे कि तेल कंपनियां भारी वित्तीय दबाव में हैं। पेट्रोलियम कंपनियों का दावा है कि महंगे क्रूड की वजह से उन्हें रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। मंत्री के अनुसार, अगर खुदरा कीमतों में इजाफा नहीं किया जाता, तो तेल कंपनियों का घाटा एक तिमाही में 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच सकता था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में की गई यह बढ़ोतरी कंपनियों के कुल घाटे की तुलना में अब भी काफी कम है।
कैसे तय होते हैं दाम: टैक्स और कमीशन का खेल
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल की लागत पर निर्भर नहीं करतीं। हर सुबह 6 बजे जब नई कीमतें जारी होती हैं, तो उनमें कई तरह के शुल्क जुड़े होते हैं। तेल के मूल भाव में केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्यों का वैट (VAT) और डीलर का कमीशन जोड़ने के बाद कीमत लगभग दोगुनी हो जाती है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दरों के हिसाब से पेट्रोल और डीजल के भाव अलग-अलग होते हैं।
आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर असर
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर केवल वाहन चलाने वालों पर ही नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से ट्रकों का भाड़ा बढ़ जाता है, जिससे फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में भी उछाल आता है। इसके अलावा खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर और पंप सेट चलाने का खर्च बढ़ने से किसानों की लागत भी बढ़ जाएगी। आने वाले दिनों में इस बढ़ोतरी के कारण महंगाई दर में और तेजी देखने को मिल सकती है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी टंकी फुल कराने से पहले अपने शहर के ताजा रेट जरूर चेक कर लें।



