
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब प्रदेश के जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में मरीजों को प्राइवेट लैब जैसी हाईटेक पैथोलॉजी जांच की सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार के उपक्रम ‘एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड’ (HLL Lifecare) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली इस सेवा का नाम ‘इंटीग्रेटेड पैथो टेस्ट’ रखा गया है। मुख्य सचिव विकास शील खुद इस पूरी योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि मरीजों को जांच के लिए भटकना न पड़े।
पुरानी व्यवस्था से छुटकारा: मशीनों और रीएजेंट के संकट का होगा अंत
वर्तमान में छत्तीसगढ़ के कई सरकारी अस्पतालों में जांच की स्थिति काफी खराब है। कहीं मशीनें हैं तो केमिकल (रीएजेंट) नहीं, और कहीं दोनों हैं तो चलाने वाले कर्मचारी नहीं। पिछली सरकार के समय हुए कथित रीएजेंट घोटाले के बाद विभाग नए टेंडर करने से बच रहा था। पुराने सिस्टम में सॉफ्टवेयर की ऐसी सेटिंग थी कि केवल एक ही कंपनी के उत्पाद काम करते थे। अब प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए सरकार ने इन सभी पेचीदगियों को खत्म करने का रास्ता निकाल लिया है। नए सिस्टम में आधुनिक ऑटोमेटिक मशीनें लगाई जाएंगी, जिससे रिपोर्ट की गुणवत्ता और रफ्तार दोनों में सुधार होगा।
मोबाइल पर मिलेगी रिपोर्ट: जोमैटो और स्विगी की तर्ज पर काम करेंगे रनर
नई व्यवस्था के तहत मरीजों को रिपोर्ट के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने होंगे। कंपनी ने एक स्मार्ट लॉजिस्टिक्स सिस्टम तैयार किया है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- सेंपल कलेक्शन: हर जिले में कंपनी अपने ‘रनर’ तैनात करेगी।
- तेज परिवहन: ये रनर जोमैटो और स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स की तरह सक्रिय रहेंगे।
- कलेक्शन सेंटर: ग्रामीण इलाकों के सेंटरों से सेंपल लेकर तुरंत जिला मुख्यालय की एडवांस लैब पहुंचाया जाएगा।
- डिजिटल रिपोर्ट: जांच पूरी होते ही रिपोर्ट सीधे मरीज के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दी जाएगी।
पांच संभागों में विजिलेंस लैब: रैंडम चेकिंग से बनी रहेगी क्वालिटी
जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार ने कड़े इंतजाम किए हैं। प्रदेश के पांचों संभागीय मुख्यालयों में विशेष ‘चेकिंग लेबोरेटरी’ स्थापित की जा रही हैं। यह एक तरह का विजिलेंस सिस्टम होगा, जहां रैंडम आधार पर सैंपल्स की दोबारा जांच की जाएगी। इससे यह पता चलेगा कि जिला स्तर पर दी जा रही रिपोर्ट सटीक है या नहीं। रायपुर में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जहां 20 विशेषज्ञों की टीम रोजाना डेटा का विश्लेषण करेगी। यदि कहीं रिपोर्ट आने में देरी होती है, तो उसे तुरंत ट्रैक कर सुधारा जाएगा।
बस्तर से होगी शुरुआत: दो महीनों में पूरे प्रदेश में लागू होगा सिस्टम
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने हाल ही में इस योजना की समीक्षा की है। सरकार की रणनीति है कि सबसे पहले चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सुधार किया जाए, इसलिए इस सेवा का आगाज बस्तर संभाग से होगा। स्वास्थ्य संचालक संजीव झा के अनुसार, शुरुआती चरण के अनुभवों के आधार पर अगले दो से तीन महीनों के भीतर पूरे छत्तीसगढ़ में इस सेवा को विस्तार दिया जाएगा। एमओयू की शर्तों में यह भी स्पष्ट है कि जहां सरकारी संसाधन (मशीन या स्टाफ) उपलब्ध हैं, कंपनी उनका उपयोग करेगी और उसी के अनुसार भुगतान का समायोजन होगा।
एचएलएल लाइफकेयर का अनुभव: केंद्र सरकार की कंपनी संभालेगी कमान
इस पूरी योजना की जिम्मेदारी संभाल रही एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाला एक सार्वजनिक उपक्रम है। 1966 में स्थापित यह कंपनी ‘हिन्दलैब्स’ ब्रांड के तहत देशभर में पैथोलॉजी लैब और इमेजिंग सेंटर संचालित करती है। हालांकि केंद्र सरकार इसके निजीकरण की प्रक्रिया पर विचार कर रही है, लेकिन इसकी तकनीकी विशेषज्ञता और ‘सहेली’ व ‘निरोध’ जैसे सफल उत्पादों के निर्माण का लंबा अनुभव छत्तीसगढ़ के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। मार्च 2026 में कंपनी ने अन्य कैंसर संस्थानों के साथ भी इसी तरह के समझौते किए हैं।
डॉक्टर और मरीज दोनों को राहत: सटीक जांच से शुरू होगा सही इलाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पैथोलॉजी रिपोर्ट सटीक नहीं होगी, डॉक्टर सही इलाज शुरू नहीं कर पाते। नई व्यवस्था से जांच का दायरा बढ़ेगा और मरीजों का सरकारी अस्पतालों पर भरोसा मजबूत होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अब महंगे प्राइवेट लैब में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार की कोशिश है कि एक ही छत के नीचे खून, पेशाब और अन्य जटिल जांचें मुफ्त या किफायती दरों पर उपलब्ध हों। 1 अप्रैल से शुरू होने वाली यह सेवा छत्तीसगढ़ के हेल्थ सेक्टर के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।



