Mobile Dispute Murder Case Raipur: मोबाइल विवाद में खौफनाक वारदात: पत्नी और दो बेटियों ने मिलकर की पिता की ले ली जान, बाथरूम में गिरने की रची थी झूठी कहानी

Mobile Dispute Murder Case Raipur: राजधानी रायपुर के न्यू चंगोराभाठा इलाके में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक सरकारी कर्मचारी की उसकी अपनी ही पत्नी और दो बेटियों ने मिलकर बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात की वजह महज इतनी थी कि पिता ने अपनी छोटी बेटी को रात में मोबाइल देखने से मना किया था। आरोपियों ने बड़ी चालाकी से इस कत्ल को एक हादसा दिखाने की कोशिश की लेकिन पुलिस की पैनी नजर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हकीकत बयां कर दी। पुलिस ने अब तीनों महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

देर रात मोबाइल देखने पर पिता ने लगाई थी डांट

यह पूरी घटना 27 सितंबर 2025 की रात की है। मृतक वीरेंद्र भारती गोस्वामी नवा रायपुर में बीज विपणन संघ में चपरासी के पद पर तैनात थे। रात करीब 11 बजे उनकी सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग बेटी मोबाइल देख रही थी। वीरेंद्र ने उसे इतनी रात को फोन इस्तेमाल करने के लिए जोर से डांटा। इसी बात पर घर में बहस शुरू हो गई। वीरेंद्र की बड़ी बेटी तनिया अपनी छोटी बहन के पक्ष में खड़ी हो गई और पिता से उलझने लगी।

विवाद बढ़ने पर मां और बेटियों ने किया जानलेवा हमला

बहस के दौरान वीरेंद्र की पत्नी दीपा भी वहां पहुंच गई। उसने बेटियों को शांत कराने के बजाय उनका साथ दिया और पति से लड़ने लगी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि तीनों ने मिलकर वीरेंद्र पर हमला बोल दिया। उन्होंने घर में रखे लकड़ी के बैट और ईंट से वीरेंद्र के सिर और चेहरे पर ताबड़तोड़ वार किए। वीरेंद्र लहूलुहान होकर फर्श पर गिर पड़े और ज्यादा खून बहने की वजह से बेहोश हो गए।

साजिश के तहत कत्ल को बताया बाथरूम का हादसा

वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों ने पुलिस और रिश्तेदारों को गुमराह करने की साजिश रची। वे वीरेंद्र को घायल अवस्था में अस्पताल ले गए और डॉक्टरों को बताया कि वह बाथरूम में फिसलकर गिर गए हैं। अस्पताल में डॉक्टरों ने वीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में सभी ने इसे सामान्य दुर्घटना माना लेकिन मृतक के कुछ परिजनों को संदेह हुआ और उन्होंने डीडी नगर पुलिस को मामले की जानकारी दी।

घर से मिटा दिए थे खून और सबूतों के निशान

अस्पताल से वापस आने के बाद दीपा और उसकी दोनों बेटियों ने सबूत मिटाने का काम शुरू किया। उन्होंने फर्श पर फैले खून को धोकर साफ कर दिया ताकि किसी को शक न हो। हत्या में इस्तेमाल किए गए लकड़ी के बैट, ईंट और खून से सने कपड़ों को उन्होंने पास के एक नाले में फेंक दिया। उन्हें लगा कि इस सफाई के बाद वे बच जाएंगे लेकिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले चोट के 17 गंभीर निशान

पुलिस ने वीरेंद्र के शव को जांच के लिए भेजा था जिसकी विस्तृत रिपोर्ट अप्रैल 2026 में आई। इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि यह हादसा नहीं बल्कि बेरहमी से किया गया कत्ल है। डॉक्टरों को वीरेंद्र के शरीर पर 17 जगह चोट के गहरे निशान मिले। शरीर के अंदरूनी हिस्सों में हुई गंभीर चोटों और सिर पर वार को मौत की मुख्य वजह बताया गया। इसके बाद पुलिस का शक परिवार पर गहरा गया।

पुलिस की कड़ाई के आगे टूटा मां और बेटियों का हौसला

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने पत्नी दीपा और बड़ी बेटी तनिया को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआत में तीनों अपने बयान पर अड़ी रहीं लेकिन जब पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य सामने रखे तो उनका हौसला टूट गया। तीनों ने मिलकर स्वीकार किया कि मोबाइल विवाद की वजह से उन्होंने ही वीरेंद्र की हत्या की है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर नाले से हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिए हैं।

जेल भेजी गईं तीनों आरोपी महिलाएं

डीडी नगर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 238 और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दीपा, तनिया और नाबालिग बेटी को गिरफ्तार कर लिया है। मामूली मोबाइल विवाद में एक पूरे परिवार का इस तरह बिखर जाना और रिश्तों का कत्ल होना पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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