
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के छोटे और मध्यम कस्बों को आधुनिक शहरी मॉडलों के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप राज्य में ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ की शुरुआत की गई है। इस बेहद महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में प्रदेश के 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है, जिसमें धमतरी जिले से नगर पालिका कुरुद भी शामिल है। योजना के सुचारू संचालन के लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 200 करोड़ रुपए का शुरुआती प्रावधान किया गया है। इस राशि से चुनिंदा छोटे शहरों में बड़े महानगरों की तर्ज पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
कुरुद बनेगा शहरी विकास का रोल मॉडल, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छता पर रहेगा मुख्य फोकस
इस योजना की कड़ियों को जोड़ते हुए कुरुद नगर पालिका को एक आदर्श मॉडल के रूप में पुनर्विकसित करने का खाका तैयार किया गया है। अब तक मुख्य रूप से अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान और उपजाऊ मिट्टी के लिए पहचाने जाने वाले कुरुद में अब आधुनिक नागरिक सुविधाओं, व्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट प्रणालियों और सुनियोजित कॉलोनियों की एक नई रूपरेखा तैयार होगी। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यह कुरुद के नागरिकों के लिए गौरव की बात तो है ही, साथ ही शहर को स्वच्छ, सुंदर और पॉलिथीन मुक्त बनाने में स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी भी अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी।
पांचों संभागों में गठित हुईं विशेष कमेटियां, जमीनी स्तर पर सर्वे कर 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने योजना को धरातल पर उतारने के लिए राज्य के सभी पांचों संभागों में उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समितियों का गठन कर दिया है। सरकार ने इन कमेटियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे विकास कार्यों का आकलन केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों के जरिए न करें। समितियों के अधिकारियों को अनिवार्य रूप से संबंधित नगरों का दौरा करना होगा, वहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पार्षदों और आम नागरिकों के साथ बैठकर बैठकें करनी होंगी। जनता की जरूरतों और प्राथमिकताओं को समझने के बाद ठीक 15 दिनों के भीतर विकास कार्यों की सूची और लागत का अनुमानित बजट (एस्टीमेट) मुख्यालय भेजना होगा।
बिलासपुर संभाग में सबसे ज्यादा 9 शहरों का चयन, जानिए आपके संभाग के कौन से कस्बे चमकेगे
योजना के पहले चरण में संतुलित क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के सभी भौगोलिक क्षेत्रों के 32 छोटे नगरों को शामिल किया गया है। संभागवार चयनित नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की सूची इस प्रकार है:
- बिलासपुर संभाग (9 निकाय): तखतपुर, मुंगेली, लोरमी, जांजगीर-नैला, सक्ती, बिल्हा, घरघोड़ा, पुसौर और सरिया।
- रायपुर संभाग (6 निकाय): कुरुद, महासमुंद, आरंग, बलौदाबाजार, पिथौरा और चंदखुरी।
- बस्तर संभाग (6 निकाय): सुकमा, भोपालपट्टनम, गीदम, केशकाल, पखांजूर और नरहरपुर।
- सरगुजा संभाग (6 निकाय): सूरजपुर, पत्थलगांव, मनेन्द्रगढ़, लखनपुर, कोतबा और कुनकुरी।
- दुर्ग संभाग (5 निकाय): पंडरिया, खैरागढ़, गुरूर, घुमका और छुईखदान।
इन चार प्रमुख क्षेत्रों में होगा मुख्य रूप से सुधार, स्मार्ट सिस्टम से जुड़ेंगे छत्तीसगढ़ के कस्बे
नगरीय प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदर्श शहर समृद्धि योजना के तहत मिलने वाले फंड को मुख्य रूप से चार बड़े स्तंभों पर खर्च किया जाएगा ताकि लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके:
- बुनियादी सुविधाएं: वार्डों में चौड़ी सड़कों का निर्माण, गंदे पानी की निकासी के लिए पक्का ड्रेनेज सिस्टम, शुद्ध पेयजल की घर-घर आपूर्ति और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना।
- सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर: बच्चों के खेलने के लिए आधुनिक पार्क, सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन, बेहतर स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का आधुनिकीकरण।
- स्मार्ट और सुरक्षित शहर: नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन करने के लिए ई-गवर्नेंस, प्रमुख चौकों पर स्मार्ट ट्रैफिक लाइट, सीसीटीवी सुरक्षा प्रणाली और ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल।
- सतत विकास: नगरीय क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए नए पौधों का रोपण, सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा का उपयोग और तालाबों का जीर्णोद्धार कर जल संरक्षण।
बड़े शहरों की तरह छोटे कस्बों में भी मिलेंगी सुविधाएं, सुशासन सरकार की विकास योजना
इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य सरकार के विजन को सामने रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सुशासन सरकार बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते हुए ग्रामीण कस्बों और नगरों के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस योजना के माध्यम से नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में केवल बुनियादी ढांचा ही ठीक नहीं होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापार और रोजगार के नए अवसरों को भी सुनियोजित ढंग से बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की यह कोशिश है कि छोटे शहरों में रहने वाले युवाओं और परिवारों को भी वे सभी आधुनिक सुविधाएं अपने घर के पास ही मिलें, जिनके लिए उन्हें बड़े शहरों की तरफ पलायन करना पड़ता है।
आत्मनिर्भर और समृद्ध बनेंगे प्रदेश के छोटे निकाय, नागरिकों को मिलेगी सुगम जीवन शैली
विभागीय जानकारों के अनुसार, आदर्श शहर समृद्धि योजना असल में छत्तीसगढ़ के छोटे निकायों को वित्तीय और ढांचागत रूप से आत्मनिर्भर बनाने की एक दूरदर्शी पहल है। योजना के तहत होने वाले सभी कार्यों की निगरानी सीधे राज्य स्तर से की जाएगी ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनी रहे। आने वाले समय में जब इन 32 शहरों में नागरिक सेवाओं और अधोसंरचना का कायाकल्प होगा, तो इससे न केवल स्थानीय राजस्व में बढ़ोतरी होगी बल्कि आम जनता को भी एक स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और व्यवस्थित जीवन शैली मिल सकेगी, जो राज्य के शहरी विकास को एक नई ऊंचाई देगी।



