CG Sarpanch Mass Resignation: बड़ा प्रशासनिक संकट: विकास कार्य ठप होने से नाराज 56 सरपंचों का सामूहिक इस्तीफा, बोले- एक साल से नहीं मिला फंड, जनता को क्या मुंह दिखाएं

CG Sarpanch Mass Resignation: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है। इलाके के विकास कार्यों में महीनों से लगी रोक और सरकारी फंड न मिलने से नाराज होकर 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने एक साथ अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। ये सभी पंचायत प्रतिनिधि पिछले तीन दिनों से अंतागढ़ के प्रमुख गोल्डन चौक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए थे। शासन के रवैये से दुखी होकर आखिरकार सभी ने एक सुर में अपना त्यागपत्र ब्लॉक प्रशासन को सौंप दिया। इस ऐतिहासिक और चौंकाने वाले कदम के बाद पूरे बस्तर संभाग की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

ग्रामीण पूछ रहे हैं तीखे सवाल, बिना बजट और मंजूरी के पंचायत चलाना हुआ नामुमकिन

इस्तीफा देने वाले सरपंचों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि गांवों में उनकी सामाजिक और राजनीतिक साख पूरी तरह दांव पर लग गई है। प्रतिनिधियों का कहना है कि जब वे गांव की गलियों में निकलते हैं, तो ग्रामीण उन्हें घेरकर विकास कार्यों को लेकर तीखे सवाल पूछते हैं। एक साल से पंचायतों को किसी भी नए काम की न तो प्रशासनिक मंजूरी मिली है और न ही वित्तीय बजट जारी किया गया है। बुनियादी काम पूरी तरह ठप होने के कारण सरपंचों के पास जनता को देने के लिए कोई जवाब नहीं बचा है। ऐसी बेबसी की स्थिति में पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

सीसी रोड से लेकर हैंडपंप तक सब ठप, बारिश से पहले गांवों में गहराया बुनियादी संकट

जमीनी हकीकत यह है कि अंतागढ़ क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों में बुनियादी जरूरत की चीजें महीनों से अधूरी पड़ी हैं। गांवों के भीतर सीसी रोड का निर्माण, पीने के पानी के लिए हैंडपंपों की मरम्मत, जल निकासी के लिए नालियां और सामुदायिक भवनों जैसे छोटे लेकिन बेहद जरूरी निर्माण कार्य पूरी तरह अटके हुए हैं। स्थानीय नागरिकों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि कुछ ही दिनों में मानसून की आमद होने वाली है। बारिश से पहले यदि खराब सड़कों को ठीक नहीं किया गया और जाम पड़ी नालियों को साफ नहीं कराया गया, तो ग्रामीण इलाकों में महामारी और जलभराव का भारी संकट खड़ा होना तय है।

एक साल पहले भी प्रशासन ने दिया था केवल कोरा आश्वासन, धोखा मिलने से फूटा गुस्सा

सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रयास कर रहे थे। पिछले साल भी विकास कार्यों की रुकी हुई फाइलों को आगे बढ़ाने और पंचायतों को वित्तीय अधिकार देने की मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया गया था। उस समय जिला प्रशासन के आला अफसरों ने मौके पर पहुंचकर मध्यस्थता की थी और 15 दिनों के भीतर सभी लंबित प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी देने का लिखित भरोसा दिलाया था। हालांकि पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रही, जिससे ठगे महसूस कर रहे प्रतिनिधियों का गुस्सा इस बार फूट पड़ा।

अधिकारियों के मनमाने रवैये से नाराज प्रतिनिधि, केवल नाम की रह गई हैं ग्राम पंचायतें

धरना स्थल पर मौजूद महिला और पुरुष सरपंचों ने स्थानीय प्रशासन के अड़ियल और मनमाने रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने वाली पंचायती राज व्यवस्था को अधिकारी पूरी तरह कमजोर कर रहे हैं। सरपंचों को न तो पर्याप्त अधिकार दिए जा रहे हैं और न ही उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पंचायतें सिर्फ कागजों पर नाम के लिए बची हैं, जबकि उनके अधिकारों और बजट पर जिला मुख्यालय से ताला लगा दिया गया है। इस उपेक्षा के कारण अब जनप्रतिनिधि खुद जनता के बीच जाने से कतराने लगे हैं।

सरकार के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती, मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान

56 ग्राम पंचायतों के कप्तानों द्वारा एक साथ इस्तीफा दिए जाने से अंतागढ़ विकासखंड की पूरी ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यदि प्रशासन इन सभी का इस्तीफा स्वीकार करता है, तो आधी से ज्यादा पंचायतों में ताले लटक जाएंगे और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी तरह ठप हो जाएगा। दूसरी तरफ सरपंच संघ ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जब तक सभी स्वीकृत कार्यों के लिए बैंक खातों में फंड ट्रांसफर नहीं हो जाता, तब तक उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। इस संवेदनशील मामले में अब राज्य सरकार के दखल का इंतजार किया जा रहा है।

Also Read: Panchayat Election in Kurud Block: कुरूद ब्लॉक की 8 पंचायतों में उपचुनाव की तारीख तय, गांवों में बढ़ी चुनावी हलचल

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button