
रायपुर: लद्दाख के प्रख्यात जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किए जाने का विरोध अब छत्तीसगढ़ तक पहुँच गया है। जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर नागरिक समाज और आदिवासी समाज ने राज्य में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किया है और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

रायपुर में राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, शांतिपूर्ण विरोध
सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग करते हुए नागरिक समाज का एक प्रतिनिधिमंडल रायपुर में राज्यपाल रमन डेका से मिला और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने टाउन हॉल के पास गांधी मूर्ति स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन भी किया।

नागरिक समाज के सदस्यों ने केंद्र सरकार पर कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि लद्दाख के लोगों की न्यायोचित मांगों को लगातार अनसुना किया जा रहा है और उनके लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। वक्ताओं ने इस मुद्दे को पूरे देश के लोकतंत्र की परीक्षा बताते हुए राज्यपाल से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की।


राजनांदगांव में आदिवासी समाज का जोरदार विरोध
राजनांदगांव जिले में भी आदिवासी समाज ने शनिवार को सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में आदिवासी कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुँचे और राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा।

समाज के सदस्यों ने वांगचुक को “देशद्रोही” बताए जाने और जेल भेजने को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने देश के लिए टैंक बनाने में भी योगदान दिया है, उन्हें केवल लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों, पर्यावरण और पहचान की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करने के कारण जेल भेजा गया है। उन्होंने वांगचुक के 15 दिवसीय शांतिपूर्ण अनशन का भी जिक्र किया।
क्या है पूरा मामला? सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई
यह पूरा विवाद 26 सितंबर 2025 को लेह में तब शुरू हुआ, जब लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान हुई झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

इस घटना के बाद प्रशासन ने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया। प्रशासन ने उन पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया है, जबकि NSA के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।

इधर, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को सुनवाई निर्धारित है।
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