
छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने राज्य के शासकीय सेवकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकारी कामकाज के बढ़ते दबाव और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए प्रशासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘विपश्यना ध्यान’ के लिए विशेष अवकाश देने का आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 7 अप्रैल 2026 को जारी इस सर्कुलर के मुताबिक, अब कर्मचारी अपने सेवाकाल के दौरान मानसिक शांति और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इस प्राचीन ध्यान पद्धति का लाभ उठा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आएगा और वे जनता की सेवा और भी बेहतर ढंग से कर पाएंगे।
12 दिन की स्पेशल लीव: पूरी सैलरी के साथ मिलेगा ध्यान का मौका
शासन द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों सहित राज्य के तमाम छोटे-बड़े कर्मचारियों को 10 दिवसीय आवासीय विपश्यना शिविर में शामिल होने की अनुमति दी गई है। यात्रा के समय को जोड़कर कुल 12 दिनों का विशेष आकस्मिक अवकाश (Special Casual Leave) मंजूर किया जाएगा। सबसे राहत की बात यह है कि इस छुट्टी की अवधि को ‘ऑन ड्यूटी’ यानी कर्तव्य अवधि माना जाएगा। इसका मतलब है कि शिविर में रहने के दौरान कर्मचारी के वेतन में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी और उन्हें पूर्ण वेतन का भुगतान होगा।
पात्रता और शर्तें: आवेदन के साथ देने होंगे जरूरी दस्तावेज
इस विशेष छुट्टी का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ अनिवार्य शर्तें भी तय की हैं। कर्मचारी को अपनी छुट्टी के आवेदन के साथ विपश्यना केंद्र से प्राप्त पंजीकरण पत्र (Admission Letter) संलग्न करना होगा। शिविर संपन्न होने के बाद, कर्मचारी को केंद्र द्वारा जारी भागीदारी प्रमाण-पत्र (Completion Certificate) अपने कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है। यदि कोई कर्मचारी प्रमाण-पत्र जमा करने में विफल रहता है, तो उसकी इस छुट्टी को अर्जित अवकाश (Earned Leave) में बदल दिया जाएगा, जिससे उसकी छुट्टियों का कोटा कम हो सकता है।
सेवाकाल में 6 बार अवसर: करियर के दौरान ले सकेंगे बार-बार लाभ
राज्य सरकार ने कर्मचारियों की लंबी सेवा अवधि को देखते हुए इस सुविधा का दायरा बड़ा रखा है। कोई भी सरकारी सेवक अपने पूरे सेवाकाल के दौरान अधिकतम 6 बार इस विशेष अवकाश का लाभ ले सकता है। हालांकि, दो शिविरों के बीच एक निश्चित समय का अंतराल होना जरूरी है। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि यह छुट्टी केवल उन्हीं केंद्रों के लिए मान्य होगी जो मान्यता प्राप्त हैं और जहां 10 दिनों का पूर्ण आवासीय कोर्स संचालित किया जाता है।
खर्च खुद उठाना होगा: यात्रा भत्ता और अन्य व्यय की जिम्मेदारी कर्मचारी की
सरकार ने छुट्टी और वेतन की सुविधा तो दी है, लेकिन आर्थिक बोझ साझा करने से इनकार किया है। आदेश में साफ कहा गया है कि विपश्यना केंद्र तक जाने-आने के लिए किसी भी प्रकार का यात्रा भत्ता (TA) या दैनिक भत्ता सरकार द्वारा देय नहीं होगा। शिविर की फीस (जो आमतौर पर स्वैच्छिक दान पर आधारित होती है) और अन्य व्यक्तिगत खर्चों का वहन स्वयं कर्मचारी को ही करना होगा। सरकार केवल समय और वेतन की सुरक्षा प्रदान करेगी ताकि कर्मचारी बिना किसी मानसिक बोझ के ध्यान साधना कर सकें।
कार्य की सुगमता प्राथमिकता: सक्षम अधिकारी की अनुमति होगी जरूरी
भले ही यह अधिकार कर्मचारियों को दिया गया है, लेकिन इसे अंतिम रूप से सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बाद ही लिया जा सकेगा। विभाग प्रमुख या सक्षम अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कर्मचारी के जाने से कार्यालय का कामकाज प्रभावित न हो। यदि किसी विभाग में काम का दबाव अधिक है या कोई आपातकालीन स्थिति है, तो अधिकारी इस अवकाश को आगे बढ़ाने या स्थगित करने का निर्णय ले सकते हैं। यह पूरी तरह से स्वैच्छिक प्रक्रिया है और किसी भी कर्मचारी पर इसे थोपा नहीं जाएगा।
कार्यक्षमता में वृद्धि की उम्मीद: तनाव मुक्त प्रशासन की ओर एक कदम
विपश्यना ध्यान अपनी सादगी और प्रभावशीलता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। जानकारों का मानना है कि पुलिस, राजस्व और स्वास्थ्य जैसे विभागों के कर्मचारी जो अत्यधिक तनाव में काम करते हैं, उनके लिए यह 12 दिन का ब्रेक एक ‘रीसेट बटन’ की तरह काम करेगा। इससे न केवल कर्मचारियों का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि सरकारी दफ्तरों में आने वाले आम नागरिकों के प्रति उनके नजरिए में भी संवेदनशीलता आने की उम्मीद है।
Also Read: CG New Holiday List 2026: छत्तीसगढ़ अवकाश सूची 2026 घोषित: इस साल मिलेंगी इतनी छुट्टियाँ



