
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार ने योजना लागू होने के बाद पहली बार नियमों में कड़ाई करते हुए बायोमीट्रिक e-KYC अनिवार्य कर दी है। अब सभी लाभार्थी महिलाओं को पास के सीएससी (CSC) सेंटर जाकर अपनी पहचान साबित करनी होगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि वर्तमान में कितने लाभार्थी वास्तव में जीवित हैं और पात्रता की शर्तों को पूरा कर रहे हैं। सरकार के इस कदम से उन लाखों महिलाओं को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी जो हर महीने योजना का लाभ ले रही हैं।
सत्यापन के लिए सख्त नियम: अपात्रों की छंटाई के लिए बनाया गया मैकेनिज्म
विधानसभा चुनाव में गेमचेंजर साबित हुई इस योजना में शुरुआत में सत्यापन की प्रक्रिया काफी सरल रखी गई थी। उस दौरान पात्रता के मापदंडों को लेकर बहुत ज्यादा सख्ती नहीं बरती गई, जिसका नतीजा यह हुआ कि कई ऐसे लोग भी जुड़ गए जो तकनीकी रूप से इसके पात्र नहीं थे। महिला एवं बाल विकास विभाग के पास अब तक ऐसा कोई फिल्टरिंग सिस्टम नहीं था जिससे डेटा को साफ किया जा सके। अब विभाग ने एक मजबूत मैकेनिज्म तैयार किया है ताकि केवल उन्हीं महिलाओं को पैसा मिले जो नियमों के दायरे में आती हैं।
शुरुआती कमियां होंगी दूर: गलत बैंक खातों और आधार लिंकिंग पर नजर
मार्च 2024 में जब यह योजना शुरू हुई, तब केवल आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी के आधार पर ही पंजीयन कर लिया गया था। जांच में पाया गया है कि कई महिलाओं ने अब तक अपना बैंक खाता आधार से लिंक नहीं कराया है। इसके अलावा, कई आवेदन पत्रों में बैंक अकाउंट नंबर और वैवाहिक स्थिति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी गलत भरी गई हैं। सरकार अब धीरे-धीरे ऐसे संदिग्ध लाभार्थियों को डेटाबेस से अलग कर रही है ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो सके।
30 जून तक की समयसीमा: तीन महीने के भीतर कराना होगा e-KYC
बायोमीट्रिक सत्यापन की यह प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होकर 30 जून तक चलेगी। इन तीन महीनों के भीतर सभी लाभार्थियों को अपनी बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य है। सरकार इस प्रक्रिया के जरिए यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि लाभार्थी महिला उसी पते पर रह रही है या नहीं, जहां का उसने उल्लेख किया है। जिन महिलाओं के नाम, मोबाइल नंबर या आधार डेटा में कोई भी विसंगति पाई जा रही है, उनका भुगतान फिलहाल होल्ड (रोक) किया जा रहा है।
सीएससी सेंटरों पर थंब इंप्रेशन: अंगूठा लगाते ही साबित होगी पहचान
नया आदेश स्पष्ट करता है कि हर लाभार्थी महिला को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर बायोमीट्रिक डिवाइस पर अपना अंगूठा (Thumb Impression) लगाना होगा। इस डेटा को सरकारी डेटाबेस में दर्ज नाम और पहचान से क्रॉस-वेरीफाई किया जाएगा। अगर बायोमीट्रिक पहचान और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी आपस में मेल नहीं खाती है, तो योजना की अगली किस्त रोक दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिला स्तर पर सीएससी मैनेजर्स को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
भुगतान में आएगी पारदर्शिता: पहचान में अंतर मिलने पर रुकेगा पैसा
सरकार का लक्ष्य है कि महतारी वंदन योजना का पैसा सीधे और सुरक्षित तरीके से सही हाथों तक पहुंचे। बायोमीट्रिक सत्यापन से फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। पहचान साबित न होने या डेटा में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित महिला का पेमेंट तब तक जारी नहीं किया जाएगा जब तक वह जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर देती। इस नई व्यवस्था के लिए विभाग के कर्मचारियों और सीएससी संचालकों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को केंद्र पर ज्यादा परेशानी न हो।

प्रशासन की तैयारी: जिला स्तर पर समन्वय और मॉनिटरिंग शुरू
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे सीएससी सेंटरों के साथ तालमेल बिठाकर इस काम को समय पर पूरा करें। वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग जिला प्रशासन करेगा। लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपना सत्यापन करा लें। सरकार का मानना है कि इस शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद योजना के क्रियान्वयन में और अधिक पारदर्शिता आएगी और पात्र महिलाओं को बिना किसी तकनीकी बाधा के निरंतर लाभ मिलता रहेगा।





