CG Anganwadi Center: किराए के भवनों में नहीं चलेंगी आंगनबाड़ियां: छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, अब यहां शिफ्ट होंगे केंद्र

CG Anganwadi Center: छत्तीसगढ़ में अब भवन विहीन और किराए के मकानों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर विष्णुदेव साय सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कमरे या अनुपयोगी भवन खाली पड़े हैं, वहां इन आंगनबाड़ी केंद्रों को तत्काल शिफ्ट करने की व्यवस्था की जाए। शासन का मानना है कि इस कदम से उन केंद्रों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके पास खुद की कोई पक्की बिल्डिंग नहीं है। इस नए आदेश के बाद अब नौनिहालों को एक ही परिसर के भीतर प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ पोषण आहार की बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

मुख्य सचिव की बैठक में बनी सहमति, युक्तियुक्तकरण के बाद खाली कमरों का होगा सही इस्तेमाल

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र के मुताबिक, यह बड़ा फैसला मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक के बाद लिया गया है। इस बैठक में प्रदेश के सरकारी स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) की समीक्षा की गई थी। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि छात्र संख्या के आधार पर कई स्कूलों के समायोजन के बाद अनेक शासकीय स्कूल भवनों में अतिरिक्त कमरे पूरी तरह खाली और अनुपयोगी पड़े हैं। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर यह सहमति बनी कि इन खाली कमरों को ताला बंद रखने के बजाय इनका उपयोग आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए किया जाए।

सभी जिला कलेक्टरों को टास्क, अतिरिक्त जगह वाले प्राथमिक और मिडिल स्कूलों की शुरू हुई पहचान

राज्य शासन के इस आदेश के बाद अब मैदानी स्तर पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिलों के कलेक्टरों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले ऐसे प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की सूची तैयार करें जहां अतिरिक्त बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। इन चिन्हित परिसरों में बिना भवन वाली स्थानीय आंगनबाड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार की मंशा यह है कि जब स्कूल और आंगनबाड़ी एक ही बाउंड्री वॉल के भीतर चलेंगे, तो बच्चों को खेल-खेल में सीखने का एक सुरक्षित और शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।

महिला एवं बाल विकास और शिक्षा विभाग मिलकर करेंगे काम, समन्वय के लिए अफसरों को जिम्मेदारी

इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए राज्य के दो बड़े विभागों को मिलकर काम करना होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने आदेश की प्रतिलिपि महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय को भी साझा की है। दोनों विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाई जा रही है जो भवनों के हैंडओवर और संचालन की रूपरेखा तय करेगी। इस प्रशासनिक तालमेल से उन हजारों केंद्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो पिछले कई बरसों से तंग गलियों या किसी के निजी मकानों में अस्थायी रूप से संचालित हो रहे थे।

ग्रामीण अंचलों के नौनिहालों को मिलेगी बड़ी राहत, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं होंगी दुरुस्त

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र किसी पंचायत भवन, सामुदायिक शेड या किराए के कमरों में जैसे-तैसे चल रहे हैं। इन जगहों पर अक्सर बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल और साफ-सुथरे शौचालयों का घोर अभाव रहता है। स्कूल परिसर में जगह मिलने से बच्चों को अब सीधे तौर पर बिजली, पंखे, सुरक्षित बाउंड्री और खेल मैदान की सुविधा मिल जाएगी। इससे न केवल बच्चों की उपस्थिति में सुधार होगा, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी रोजमर्रा के कामकाज के प्रबंधन में काफी आसानी होगी।

बजट के उपयोग पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल, करोड़ों खर्च होने के बाद भी क्यों पड़ी स्कूल की जरूरत

सरकार के इस फैसले ने प्रशासनिक व्यवस्था और बजट के आवंटन पर एक नया सवाल भी खड़ा कर दिया है। हर साल महिला एवं बाल विकास विभाग को नई आंगनबाड़ी बिल्डिंगों के निर्माण के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट जारी किया जाता है। लगातार नए भवनों की स्वीकृति के आदेश भी जारी होते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर वह बजट कहां इस्तेमाल हो रहा है कि आज विभाग को अपने केंद्र चलाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के कमरों की मदद लेनी पड़ रही है। इस लचर नीति को लेकर विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

नीतिगत फैसले पर सियासत तेज होने के आसार, विपक्ष बना सकता है इसे बड़ा मुद्दा

इस प्रशासनिक आदेश के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में भी गर्माहट आने की उम्मीद है। मुख्य विपक्षी दल इस निर्णय को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के नाम पर असल में कई सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है, और अब उसी नाकामी को छिपाने के लिए खाली पड़े भवनों में आंगनबाड़ी शिफ्ट करने का तर्क दिया जा रहा है। दूसरी तरफ, सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि यह राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि सरकारी संसाधनों के सही इस्तेमाल और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लिया गया एक व्यावहारिक कदम है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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