भुट्टे की आड़ में अफीम का ‘काला खेल’: पुलिस की बड़ी छापामार कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में नशीले पदार्थों की खेती का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान ने कानून की नजरों से बचने के लिए अपने खेत में भुट्टे की फसल के बीच अफीम (Opium) के पौधे लगा रखे थे। मुखबिर की सटीक सूचना पर एएसपी मणिशंकर चंद्रा और जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस ने संयुक्त रूप से खेत पर धावा बोला। मौके पर पहुँची पुलिस टीम उस वक्त हैरान रह गई जब उन्होंने मक्के के ऊंचे पौधों के बीच अफीम की लहलहाती फसल देखी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरी फसल को अपनी निगरानी में ले लिया है और मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने संदिग्ध को लिया हिरासत में, पूछताछ जारी

छापामार कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिससे अज्ञात स्थान पर पूछताछ की जा रही है। एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलने के तुरंत बाद टीम गठित कर कार्रवाई की गई। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अफीम की खेती कितने समय से की जा रही थी और इसके बीज कहाँ से लाए गए थे। साथ ही, इस अवैध कारोबार के पीछे किसी बड़े गिरोह या अंतरराज्यीय तस्करों के हाथ होने की आशंका की भी जांच की जा रही है।

दुर्ग जिले में अफीम की खेती का यह पहला मामला

यह मामला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि दुर्ग जैसे मैदानी और औद्योगिक जिले में अफीम की खेती का यह पहला मामला दर्ज किया गया है। आमतौर पर छत्तीसगढ़ के कुछ सीमावर्ती वनांचलों में गांजे की खेती की खबरें आती रही हैं, लेकिन अफीम का मिलना पुलिस के लिए एक नई चुनौती है। खेत की भौगोलिक स्थिति और फसल के पैटर्न से यह स्पष्ट होता है कि इसे बहुत ही सुनियोजित तरीके से छुपाकर उगाने का प्रयास किया गया था, ताकि किसी को शक न हो।

बड़े खुलासे की उम्मीद और सुरक्षा व्यवस्था

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पकड़े गए संदिग्ध से पूछताछ के बाद इस अवैध नेटवर्क के बारे में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि क्या आसपास के अन्य खेतों में भी इसी तरह की अवैध फसलें उगाई जा रही हैं। इस कार्रवाई के बाद से समोदा गांव और आसपास के क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने बरामद पौधों को जब्त कर लिया है और नारकोटिक्स एक्ट (NDPS) के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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