
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने गौसेवा आयोग नियम 2005 में संशोधन करते हुए जिला स्तरीय और विकासखंड स्तरीय समितियों का गठन किया है, जिसके तहत बड़ी संख्या में नियुक्तियाँ की गई हैं। राज्य बनने के बाद यह पहली बार है जब गौशालाओं का निरीक्षण और पर्यवेक्षण करने के लिए इतने वृहद स्तर पर कमेटियों का गठन किया गया है। इन दोनों स्तरों की समितियों में कुल 934 अध्यक्ष और सदस्य बनाए गए हैं।

गौशालाओं के निरीक्षण और प्रबंधन का दायित्व
राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग अधिनियम 2004 के अंतर्गत इन समितियों के गठन का आदेश जारी किया है। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य राज्य में संचालित गौशालाओं की निगरानी, निरीक्षण और प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना है। सभी नवनियुक्त अध्यक्षों और सदस्यों को पंजीकृत गौशालाओं का निरीक्षण और पर्यवेक्षण करने का दायित्व सौंपा गया है।
- बैठकों का आयोजन: समिति की बैठकें हर महीने एक बार जिला स्तर पर और एक बार विकासखंड स्तर पर आयोजित की जाएँगी, जिसकी अध्यक्षता संबंधित स्तर के अध्यक्ष करेंगे।
- विकासखंड समिति का कार्य: विकासखंड स्तरीय समिति गौशालाओं की स्थिति, पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य, तथा अनुदान उपयोगिता पर निगरानी रखेगी और अपनी रिपोर्ट जिला स्तरीय समिति को सौंपेगी।
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जैविक खेती और पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा
ये समितियाँ छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के प्रावधानों के तहत कार्य करेंगी।
- जिला स्तरीय समिति: जिला स्तर पर यह समिति गौशालाओं का निरीक्षण करेगी और जैविक खेती, जैविक खाद उत्पादन तथा पंचगव्य उत्पादों के संबंध में किसानों व गौशाला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देगी।
- अन्य कार्य: गौशालाओं के पंजीयन और अनुदान संबंधी कार्य भी इन समितियों की अनुशंसा पर ही होंगे।



