
CG Borebasi Benefits: छत्तीसगढ़ में सूरज के तेवर तीखे होते ही पारंपरिक खानपान की लोकप्रियता एक बार फिर बढ़ गई है। भीषण गर्मी और 40 डिग्री के पार जाते पारे के बीच ‘गोंदली-बोरेबासी’ लोगों की पहली पसंद बन गया है। यह भोजन न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि चिलचिलाती धूप में शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। आधुनिक जीवनशैली के बीच अब शहरों में भी लोग सेहत को दुरुस्त रखने के लिए इस पारंपरिक देसी आहार को अपना रहे हैं।
भीषण गर्मी में छत्तीसगढ़िया खानपान की बढ़ती मांग
Borebasi ke Fayd: जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है छत्तीसगढ़ के घरों में पारंपरिक व्यंजनों की प्रमुखता से वापसी हो रही है। लोग महंगे हेल्थ ड्रिंक्स के बजाय अब अपने पुराने और आजमाए हुए आहार की ओर लौट रहे हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में ‘गोंदली-बोरेबासी’ शरीर को भीतर से ठंडा रखने में सबसे ज्यादा असरदार साबित होता है। ग्रामीण इलाकों से निकलकर अब यह भोजन शहरी मध्यम वर्ग की थाली तक पहुंच गया है और इसे एक बेहतरीन स्वास्थ्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
डिहाइड्रेशन और लू से बचाने में कारगर है बोरे-बासी
गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। बोरे-बासी असल में रात के पके चावलों को पानी में भिगोकर तैयार किया जाता है। इस पानी में शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व और भरपूर जल मौजूद होता है जो लू के थपेड़ों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसे खाने से दिनभर शरीर में नमी बनी रहती है और भीषण धूप में काम करने के बावजूद थकावट का अहसास काफी कम होता है।
फर्मेंटेशन प्रक्रिया से मिलता है शरीर को भरपूर पोषण
चावल को रातभर पानी में भिगोकर रखने से उसमें फर्मेंटेशन यानी खमीरीकरण की प्रक्रिया होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्राकृतिक प्रक्रिया के बाद चावल के पोषक तत्व कई गुना बढ़ जाते हैं। इसमें विटामिन बी-12, आयरन और पोटैशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ-साथ पेट की समस्याओं को दूर करने के लिए भी सबसे बढ़िया देसी उपाय माना जाता है।
गोंदली और बासी का मेल देता है दोतरफा सुरक्षा
बोरे-बासी के साथ ‘गोंदली’ यानी प्याज का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। प्याज में मौजूद तत्व शरीर को लू से लड़ने की शक्ति देते हैं और लू के असर को कम करते हैं। इसके साथ आम का अचार या कोई देसी भाजी इस आहार को एक संतुलित भोजन बना देती है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के किसान सदियों से खेत जाने से पहले इसका सेवन करते रहे हैं ताकि वे कड़ी धूप में भी स्वस्थ रहकर काम कर सकें।
डॉक्टर भी दे रहे हैं इसे नियमित खाने की सलाह
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के जानकार भी अब बोरे-बासी के फायदों को खुलकर स्वीकार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंडी प्रकृति का होने के कारण यह रक्तचाप को नियंत्रित रखने और पेट की गर्मी को शांत करने में सहायक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में मिलने वाले पैकेट बंद जूस या कोल्ड ड्रिंक्स के मुकाबले यह प्राकृतिक आहार कहीं अधिक सुरक्षित और पौष्टिक है। इसी कारण अब स्वास्थ्य विभाग भी गर्मी के मौसम में लोगों को इसका सेवन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
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