CG D.Ed Candidates Protest: नियुक्ति के लिए डीएड अभ्यर्थियों की अनोखी गुहार: मंत्रियों को दंडवत प्रणाम कर की पूजा-अर्चना, 100 दिन बाद भी नहीं बनी बात

छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षकों के 2300 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन अब एक भावुक मोड़ पर पहुंच गया है। अपनी मांगों को अनसुना किए जाने से आहत युवाओं ने रायपुर की सड़कों पर विरोध का एक अनोखा और शांतिपूर्ण तरीका अपनाया। अभ्यर्थियों ने प्रदेश के सभी 14 कैबिनेट मंत्रियों के नाम पर दंडवत प्रणाम किया और बाकायदा आरती उतारकर पूजा-अर्चना की। भगवान से प्रार्थना करते हुए इन युवाओं ने कहा कि शासन-प्रशासन को ‘सद्बुद्धि’ मिले ताकि वर्षों से अटकी भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके। शिक्षित बेरोजगारों का यह दर्द अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

104 दिनों का संघर्ष: आमरण अनशन और जेल यात्रा के बाद भी नहीं टूटा हौसला

डीएड अभ्यर्थियों के इस आंदोलन को आज 100 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है। अपनी वाजिब मांगों के लिए ये युवा पिछले 104 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने और आमरण अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन ने उन पर झूठे केस दर्ज किए और उन्हें तीन बार सेंट्रल जेल तक भेजा गया। इतनी सख्त कार्रवाई के बाद भी अभ्यर्थियों का मनोबल नहीं टूटा है। वे अब भी गांधीवादी तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और सरकार से केवल नियुक्ति पत्र की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

दंडवत प्रणाम और आरती: विरोध का प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक रास्ता

राजधानी में हुए इस प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी जमीन पर लेटकर मंत्रियों को नमन करते दिखे। हाथ में अगरबत्ती और आरती की थाली लिए इन युवाओं ने कहा कि यह किसी के प्रति व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि सोए हुए सिस्टम को जगाने का एक प्रतीकात्मक प्रयास है। लोकतांत्रिक देश में अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए उन्होंने अहिंसा और भक्ति का मार्ग चुना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब दलीलों और नारों से काम नहीं बना, तो अब वे अध्यात्म के जरिए अपनी बात सत्ता के गलियारों तक पहुंचाना चाहते हैं।


2300 पदों का सवाल: केवल आश्वासनों के भरोसे बैठे हैं हजारों परिवार

अभ्यर्थियों की मुख्य मांग सहायक शिक्षकों के रिक्त 2300 पदों पर तत्काल नियुक्ति की है। भर्ती प्रक्रिया के सभी चरणों को पार करने के बाद भी इन्हें जॉइनिंग लेटर नहीं दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे कई बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘जल्द विचार करने’ का आश्वासन ही मिला है। नियुक्तियां न होने से हजारों परिवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है और युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ रहा है।

जेल से धरना स्थल तक: दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुटता

आंदोलन के दौरान प्रशासन के रवैये को लेकर अभ्यर्थियों में काफी नाराजगी है। उन्होंने बताया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पर उन्हें अपराधियों की तरह जेल में डाल दिया गया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। उनका कहना है कि दमनकारी नीतियों से उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से आए डीएड डिग्रीधारी युवा अब रायपुर में ही डेरा डाले हुए हैं और उनका साफ कहना है कि जब तक नियुक्ति का आदेश नहीं आता, वे वापस नहीं लौटेंगे।


उग्र आंदोलन की चेतावनी: जल्द निर्णय न होने पर बढ़ेगी सरकार की मुश्किलें

डीएड अभ्यर्थियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर आने वाले दिनों में उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में होने वाले किसी भी उग्र विरोध या चक्काजाम की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अभ्यर्थियों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री से मानवीय आधार पर उनकी स्थिति को गंभीरता से लेने का निवेदन किया है। अब देखना होगा कि पूजा-पाठ और आरती के इस अनोखे विरोध का सरकार पर कितना असर होता है।

क्या है पूरा विवाद: कानूनी अड़चनों और प्रशासनिक सुस्ती के बीच फंसी भर्ती

यह पूरा मामला सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आई तकनीकी और कानूनी बाधाओं से जुड़ा है। एक तरफ कोर्ट के फैसले और दूसरी तरफ विभाग की कछुआ चाल ने इस भर्ती को उलझा कर रख दिया है। डीएड अभ्यर्थियों का तर्क है कि वे नियमों के तहत पात्र हैं और उनके कोटे की सीटें खाली होने के बावजूद विभाग जानबूझकर देरी कर रहा है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, बेरोजगार युवाओं का धैर्य जवाब दे रहा है और अब यह मुद्दा पूरी तरह से राजनीतिक रंग लेता जा रहा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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