
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 23 फरवरी से शुरू हुआ यह सत्र लगभग एक महीने तक चला, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य देखने को मिले। समापन के अवसर पर सभापति धरम लाल कौशिक ने सदन की कार्यवाही को स्थगित करने की घोषणा की। इस पूरे सत्र के दौरान कुल 108 घंटे चर्चा हुई, जिसमें राज्य सरकार के 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
सवालों की झड़ी लेकिन चर्चा कम: 2924 में से सिर्फ 86 प्रश्नों पर हुआ जवाब-सवाल
इस बजट सत्र में विधायकों की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदन में कुल 2,924 सवाल लगाए गए थे। हालांकि, समय की कमी और हंगामे के चलते इनमें से केवल 86 प्रश्नों पर ही सदन के भीतर विस्तार से चर्चा हो सकी। बाकी सवालों के जवाब लिखित रूप में पटल पर रखे गए। प्रश्नकाल के दौरान विधायकों ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरा, वहीं मंत्रियों ने विभागवार अपनी योजनाओं का ब्यौरा पेश किया।
आखिरी दिन का मास्टरस्ट्रोक: पेपर लीक और भर्ती धांधली पर सख्त कानून पास
सत्र के अंतिम दिन साय सरकार ने युवाओं के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम विधेयक 2026′ पारित किया। इस नए कानून के तहत अब प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले नकल माफियाओं को 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना होगा। इसके अलावा ‘स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड बिल 2026’ को भी मंजूरी दी गई, जिससे भविष्य में होने वाली सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
जनता के मुद्दों पर मंथन: ध्यानाकर्षण और विधेयकों की मंजूरी के साथ समापन
सत्र के दौरान केवल बजट ही नहीं, बल्कि कई अन्य जनहितकारी विधेयकों को भी सदन की हरी झंडी मिली। ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के जरिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। आखिरी दिन सभापति ने सभी सदस्यों को सत्र के सफल संचालन के लिए धन्यवाद दिया और बताया कि कैसे 108 घंटों की इस मेहनत ने प्रदेश के विकास का रोडमैप तैयार किया है। अब सरकार का पूरा ध्यान बजट में की गई घोषणाओं को धरातल पर उतारने पर रहेगा।



