DPI ने जारी किया अजीबोगरीब आदेश, स्कूलों में अब प्रिंसिपल करेंगे ‘डॉग काउंट’: आवारा कुत्तों की धरपकड़ की तैयारी

राजधानी रायपुर से एक अजीबोगरीब आदेश सामने आया है, जहाँ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने स्कूलों के प्राचार्यों और प्रधान पाठकों को परिसर के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों की जानकारी जुटाने का काम सौंपा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पशुधन विकास विभाग आवारा कुत्तों की धरपकड़ की रणनीति बना रहा है। चूंकि स्कूलों के आसपास बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते हैं और कई बार बच्चों को काट लेते हैं, इसलिए अब उनकी जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी संस्था प्रमुखों को दी गई है।

कुत्ते का रंग और पहचान बताना होगा अनिवार्य

इस आदेश के बाद DPI ने एक निर्धारित फॉर्मेट जारी किया है, जिसे भरकर प्राचार्यों को जमा करना होगा। इस प्रपत्र में संस्था प्रमुखों को स्कूल के आसपास देखे गए आवारा कुत्तों की विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें कुत्ते का प्रकार, लिंग (मेल/फीमेल), उसका रंग और कोई विशेष पहचान भी बतानी होगी। इसके अलावा, कुत्ता किस समय परिसर में देखा गया, यह जानकारी भी फॉर्मेट में हस्ताक्षर के साथ देनी अनिवार्य है।

फॉर्मेट में भरनी होंगी ये मुख्य जानकारी

जारी किए गए फॉर्मेट के अनुसार, संस्था प्रमुखों को आवारा कुत्तों से संबंधित जानकारी के साथ-साथ अपनी संस्था की पहचान भी दर्ज करनी होगी। इस प्रपत्र में संस्था का नाम, संकुल, विकासखंड और जिला जैसी बुनियादी जानकारी भी भरनी होगी। DPI का यह कदम जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और संयुक्त निदेशकों (JD) को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देता है कि सभी संस्था प्रमुख इस नए नियम का सख्ती से पालन करें।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती

यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों की धरपकड़ करने के आदेश के बाद शुरू की गई है। आवारा कुत्तों के हमले से स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। DPI के आदेश और निर्धारित फॉर्मेट का उद्देश्य यह है कि पशुधन विकास विभाग को सटीक जानकारी मिले, जिससे वे स्कूल परिसरों के आसपास से कुत्तों को पकड़ने की उचित योजना बना सकें और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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