
Sushan Tihar Dhamdha: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे सुशासन शिविरों के माध्यम से सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे पात्र व्यक्तियों तक आसानी से पहुंच रहा है। ये शिविर ग्रामीण इलाकों में लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी आजीविका को बढ़ाने का एक बड़ा जरिया बन रहे हैं। इसी क्रम में, दुर्ग जिले के जनपद पंचायत धमधा के अंतर्गत आने वाले ग्राम मलपुरी कला के रहने वाले भरत निषाद के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। लंबे समय से अपने पैतृक व्यवसाय से परिवार का पेट पाल रहे भरत को सुशासन तिहार के मंच से अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ी सौगात मिली है।
पैतृक व्यवसाय को आगे बढ़ाने की थी इच्छा, वित्तीय संकट के कारण रुकी थी योजना
मलपुरी कला गांव के रहने वाले भरत निषाद परंपरागत रूप से मत्स्य पालन (मछली पालन) के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। वे वर्षों से इसी काम के जरिए अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। भरत काफी समय से अपने इस पैतृक काम का विस्तार करने और उसे ज्यादा मुनाफेदार बनाने की योजना बना रहे थे। हालांकि, नया बीज डालने, तालाब की देखरेख करने और मत्स्य पालन के आधुनिक संसाधनों को खरीदने के लिए उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी। इस वित्तीय कमी के कारण वे अपने काम को आगे बढ़ाने में असमर्थ महसूस कर रहे थे।
मलपुरी कला गांव में लगा था सुशासन तिहार, आवेदन करते ही विभाग ने जांची पात्रता
भरत निषाद की इस समस्या का समाधान तब हुआ जब उनके खुद के गांव मलपुरी कला में जिला प्रशासन की ओर से ‘सुशासन तिहार’ शिविर का आयोजन किया गया। भरत अपनी आर्थिक दिक्कतों को लेकर इस शिविर में पहुंचे और वहां लगे मत्स्य पालन विभाग के स्टॉल पर जाकर वित्तीय सहायता के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत किया। शिविर में मौजूद विभागीय अधिकारियों ने बिना किसी देरी के मौके पर ही भरत की मांग और योजना के नियमों के तहत उनकी पात्रता का बारीक परीक्षण किया। सभी दस्तावेज सही पाए जाने पर विभाग ने तुरंत आगे की फाइल क्लियर कर दी।
मौके पर ही मिला ₹1 लाख का चेक, पारदर्शी और त्वरित व्यवस्था देखकर खुश हुए ग्रामीण
अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई का नतीजा यह हुआ कि शिविर के भीतर ही मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित योजना के तहत भरत निषाद को उनकी आजीविका के संवर्धन के लिए ₹1 लाख की वित्तीय सहायता राशि का चेक सौंप दिया गया। सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे बिना, महज एक शिविर में इतनी बड़ी सहायता राशि का चेक हाथ में आते ही हितग्राही भरत निषाद के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती थी। शिविर में मौजूद अन्य ग्रामीणों ने भी शासन की इस बेहद पारदर्शी और तेज कार्यप्रणाली की सराहना की।
नए आजीविका अनुदान से आधुनिक संसाधनों का होगा विस्तार, काम को मिलेगा नया आधार
मदद का चेक प्राप्त होने के बाद अपनी प्रसन्नता साझा करते हुए हितग्राही भरत निषाद ने बताया कि इस आजीविका अनुदान राशि का उपयोग वे पूरी तरह से अपने मछली पालन के काम को नया रूप देने में करेंगे। उन्होंने कहा कि इन पैसों से वे तालाब के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्तम किस्म के मत्स्य बीज (मछली के बच्चे) और बेहतर चारा खरीदेंगे। इसके साथ ही मछली पकड़ने और उन्हें सुरक्षित बाजार तक पहुंचाने के लिए जरूरी आधुनिक तकनीकी संसाधनों का विस्तार भी करेंगे, जिससे उनके इस पारंपरिक काम को एक मजबूत आधार मिलेगा।
बच्चों की बेहतर शिक्षा और परिवार की तरक्की में मददगार साबित होगी यह सरकारी सहायता
भरत निषाद का मानना है कि शासन की तरफ से मिला यह वित्तीय सहयोग केवल उनके व्यवसाय को ही सुदृढ़ नहीं करेगा, बल्कि उनके पूरे परिवार के आर्थिक स्तर को ऊपर उठाने में मददगार बनेगा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि काम से होने वाली अतिरिक्त कमाई से वे अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा को और बेहतर ढंग से पूरा करा सकेंगे। अब उन्हें बच्चों की स्कूल फीस या उनके सुनहरे भविष्य के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनके पूरे परिवार की सामाजिक स्थिति सुधरेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का जताया आभार, आत्मनिर्भर बन रहे हैं ग्रामीण
इस त्वरित और बिना किसी बिचौलिए के सीधे मिली शासकीय मदद के लिए हितग्राही भरत निषाद ने सूबे के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और दुर्ग जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार प्रकट किया है। भरत निषाद की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि धरातल पर आयोजित होने वाले जिला प्रशासन के ये विशेष सुशासन शिविर ग्रामीण क्षेत्रों के लक्षित समूहों और जरूरतमंदों को आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में लगातार कामयाब साबित हो रहे हैं।



