शिक्षा विभाग के भीतर बड़ा संकट: 8 संकुल समन्वयकों ने सामूहिक रूप से छोड़ा पद, काम के बोझ और भयादोहन को बताया वजह

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग में एक बड़ी प्रशासनिक बगावत देखने को मिली है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के 8 संकुल समन्वयकों (CAC) ने अचानक अपने पदों से इस्तीफा देकर विभाग में खलबली मचा दी है। हालांकि, कागजों पर दिए गए त्यागपत्र में सभी ने गिरते स्वास्थ्य और पारिवारिक व्यस्तताओं जैसे निजी कारणों का जिक्र किया है, लेकिन अंदरूनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सूत्रों की मानें तो ये शिक्षक लंबे समय से अपनी मूल जिम्मेदारी (पढ़ाना) के अलावा थोपे गए प्रशासनिक बोझ से परेशान थे। फिलहाल, समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इन इस्तीफों को मंजूर नहीं किया है और समन्वयकों को ‘होल्ड’ पर रखकर उनसे बातचीत करने की कोशिश की जा रही है

पढ़ाई छोड़ डाक ढो रहे हैं गुरुजी: जाति प्रमाण पत्र से लेकर फाइलों की दौड़भाग तक, गैर-शैक्षणिक कार्यों ने बढ़ाई मानसिक परेशानी

इस्तीफा देने वाले समन्वयकों ने दबी जुबान में अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्हें शिक्षकों के मार्गदर्शन के बजाय बाबू बना दिया गया है। शैक्षणिक कार्यों के अलावा उनसे जाति प्रमाण पत्र बनवाने, अन्य विभागों के डाक लाने-ले जाने और जटिल प्रशासनिक पत्राचार जैसे काम कराए जा रहे हैं। इन गैर-शैक्षणिक कामों की वजह से न तो वे स्कूलों में बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं और न ही संकुल का प्रबंधन ठीक से हो पा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे केवल अपनी मूल जिम्मेदारी यानी शिक्षण कार्य पर ध्यान देना चाहते हैं, जिसके लिए उनकी नियुक्ति हुई थी।

जानलेवा साबित हो रहा है तनाव: एक साथी की मौत और दूसरे को हुआ लकवा, विभाग की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

इस अतिरिक्त कार्यभार और मानसिक दबाव का सीधा असर समन्वयकों की सेहत पर पड़ रहा है। हाल ही में दयालबंद संकुल के एक समन्वयक की काम के भारी तनाव के कारण असामयिक मृत्यु हो गई थी। इसी संकुल के एक अन्य शिक्षक भी काम के दबाव में हाई बीपी का शिकार हुए और उन्हें लकवा मार गया। इन घटनाओं ने समन्वयकों के भीतर डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। शिक्षकों का आरोप है कि छोटी सी मानवीय या लिपिकीय त्रुटि होने पर उच्चाधिकारी उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं, जिससे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

आरटीआई के नाम पर उगाही का धंधा: 102 आवेदनों में से 88 केवल व्यक्तिगत जानकारी के लिए, ब्लैकमेलिंग से तंग आए शिक्षक

इस्तीफे की एक और बड़ी और चौंकाने वाली वजह तथाकथित आरटीआई कार्यकर्ताओं की ब्लैकमेलिंग है। समन्वयकों का आरोप है कि कुछ लोग सूचना के अधिकार का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। मामूली गलतियां पकड़कर उन्हें नौकरी से निकलवाने या निलंबित कराने की धमकी दी जाती है और फिर मोटी रकम की मांग की जाती है। आंकड़े बताते हैं कि एक साल में विभाग में 102 आरटीआई आवेदन आए, जिनमें से 88 केवल शिक्षकों की निजी जानकारी से जुड़े थे। इसकी शिकायत पुलिस में भी की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से शिक्षकों का धैर्य जवाब दे गया है।

पद छोड़ने वाले समन्वयकों की सूची: शहर और ग्रामीण इलाकों के इन प्रमुख शिक्षकों ने दी त्यागपत्र की अर्जी

इस्तीफा देने वाले इन 8 समन्वयकों में शहर के महत्वपूर्ण संकुलों के शिक्षक शामिल हैं। ये सभी अब वापस अपने मूल स्कूल में जाकर केवल अध्यापन कार्य करना चाहते हैं। इन शिक्षकों के नाम और उनके कार्यक्षेत्र का विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है:

क्र.नाम (समन्वयक)संबंधित संकुल/क्षेत्र
1विकास साहूकुदुदंड
2मनोज सिंहबिजौर
3योगेंद्र वर्मामोपका
4आशीष वर्मासिरगिट्टी
5श्रीकांत भगतदयालबंद
6प्रभात कुमार मिश्रातारबाहर
7शेषमणी कुशवाहाचांटीडीह
8शशिभूषण पाटनवारबालक सरकंडा

प्रशासन के पाले में गेंद: क्या बातचीत से सुलझेगा मसला या खाली रहेंगे पद? भविष्य की रणनीति पर टिकी नजर

वर्तमान में बिलासपुर शिक्षा विभाग इन इस्तीफों को टालने की कोशिश कर रहा है। समग्र शिक्षा विभाग के संचालकों का कहना है कि वे समन्वयकों की समस्याओं को सुनेंगे और समाधान निकालेंगे। हालांकि, समन्वयकों का रुख साफ है कि जब तक गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ और आरटीआई के नाम पर होने वाली ब्लैकमेलिंग नहीं रुकती, वे दोबारा कार्यभार नहीं संभालेंगे। इस विवाद का सीधा असर आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी और संकुल स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन शिक्षकों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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