
CG Petrol Diesel Crisis Supply Shortage: छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल की किल्लत ने आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई बड़े जिलों में ईंधन की सप्लाई बाधित होने से हाहाकार मचा हुआ है। आलम यह है कि प्रदेश के 300 से अधिक पेट्रोल पंप पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि खुले हुए पंपों पर गाड़ियों की कई किलोमीटर लंबी कतारें नजर आ रही हैं। ईंधन बचाने की अपीलों और वीआईपी कल्चर में कटौती की खबरों के बीच उपजी घबराहट ने ‘पैनिक बायिंग’ का रूप ले लिया है, जिससे सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ गया है।
ईंधन बचाने की अपील से पैदा हुआ भ्रम और डर
संकट की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से ईंधन संरक्षण की बातें सामने आईं। पीएम की अपील और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा अपने काफिले की गाड़ियां कम करने के फैसले को लोगों ने संभावित पेट्रोल संकट की आहट मान लिया। देखते ही देखते यह चर्चा आग की तरह फैल गई कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल मिलना बंद हो जाएगा। इसी डर के चलते लोगों ने अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा ईंधन खरीदना और जमा करना शुरू कर दिया, जिसने सामान्य किल्लत को बड़े संकट में बदल दिया।
रायपुर के प्रमुख इलाकों में ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड
राजधानी रायपुर की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार की पूरी रात शहर के सरोना, भाठागांव, विधानसभा रोड और जयस्तंभ चौक जैसे प्रमुख इलाकों के पंपों पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP) और इंडियन ऑयल (IOC) के कई डिपो से समय पर सप्लाई नहीं पहुंचने के कारण पंपों पर ‘स्टॉक खत्म’ के बोर्ड लटका दिए गए। सुबह होते-होते स्थिति और बिगड़ गई और जो पंप खुले थे, वहां भी संचालकों ने राशनिंग करते हुए सीमित मात्रा में ही तेल देना शुरू किया।
बस्तर से लेकर गांव तक ईंधन के लिए हाहाकार
पेट्रोल-डीजल की यह कमी केवल शहरों तक सीमित नहीं है। बस्तर संभाग के दूरदराज इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई पूरी तरह चरमरा गई है। गांवों में खेती-किसानी के काम में लगे ट्रैक्टरों और छोटे मालवाहकों के पहिए थमने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों के पंपों पर घंटों इंतजार करने के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इसका सीधा असर परिवहन सेवाओं और छोटे व्यापारियों के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ने लगा है।
प्रशासन सख्त: जमाखोरी करने वालों पर होगी सीधी कार्रवाई
ईंधन की कमी और पैनिक बायिंग को देखते हुए राज्य प्रशासन अब ‘अलर्ट मोड’ पर है। सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों की लगातार निगरानी करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पंप संचालक जानबूझकर स्टॉक छिपाता है या कालाबाजारी करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। अधिकारियों की टीमें लगातार डिपो और पंपों का निरीक्षण कर रही हैं ताकि वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
मशीनों और स्टॉक रजिस्टर की हर रोज हो रही जांच
छत्तीसगढ़ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश में व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए रोजाना करीब 200 पेट्रोल पंपों की सघन जांच की जा रही है। जांच दल मशीनों की सील, नोजल की सटीकता और स्टॉक रजिस्टर का मिलान कर रहे हैं। रायपुर और आसपास के डिपो में तेल की लोडिंग बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उच्च अधिकारियों ने साफ किया है कि सप्लाई चेन में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर किया जा रहा है और जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
सियासी पारा गर्म: आप ने लगाया कृत्रिम संकट का आरोप
इस पूरे संकट के बीच राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। आम आदमी पार्टी ने सरकार और पंप संचालकों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कुछ बड़े संचालकों ने जानबूझकर सप्लाई रोककर बाजार में एक कृत्रिम संकट पैदा किया है ताकि कीमतों में हेरफेर किया जा सके। वहीं, डीलर्स एसोसिएशन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी देरी और रिफाइनरियों से सप्लाई कम मिलने के कारण कुछ क्षेत्रों में उपलब्धता पर असर पड़ा है।
कब तक सामान्य होंगे हालात? विशेषज्ञ जता रहे चिंता
प्रशासन भले ही दावा कर रहा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पैनिक बायिंग को रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। जब तक लोग जरूरत के हिसाब से पेट्रोल खरीदना शुरू नहीं करेंगे, तब तक सप्लाई और डिमांड का अंतर बना रहेगा। यदि अगले दो-तीन दिनों में डिपो से सप्लाई की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो जाएगा।



