
CG School New Academic Session: छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है, लेकिन राजधानी रायपुर समेत पूरे जिले के सरकारी स्कूलों में इस बार भी किताबों की भारी कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है. शिक्षा विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण स्कूलों तक समय पर पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने की प्रक्रिया अभी भी अधूरी पड़ी है. इस लेती-लतीफी का सीधा असर जिले के लाखों छात्र-छात्राओं पर पड़ने वाला है. हालात ऐसे बन गए हैं कि अगर आने वाले दिनों में पुस्तक वितरण के काम में तेजी नहीं लाई गई, तो इस साल भी बच्चों को बिना किताबों के ही नए सत्र की शुरुआत करनी पड़ेगी.
जिले के 4 विकासखंडों के साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों को होना है किताबों का वितरण
रायपुर जिले के अंतर्गत आने वाले चार प्रमुख विकासखंडों में पहली कक्षा से लेकर नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले करीब 3.50 लाख विद्यार्थियों को सरकार की ओर से निशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया जाना है. इन किताबों को समय पर स्कूलों तक पहुंचाने का जिम्मा संबंधित विभाग का है. वर्तमान जमीनी हकीकत को देखते हुए स्कूल खुलने से पहले सभी छात्र-छात्राओं के हाथों में पुस्तकें सौंपना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है. कई स्कूलों के प्राचार्यों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में बच्चों को मुख्य किताबों की जगह केवल अभ्यास पुस्तिकाएं ही दी जा रही हैं.
धरसींवा में काम पूरा और आरंग में आखिरी चरण, लेकिन बाकी दो ब्लॉकों में प्रक्रिया शुरू तक नहीं
पुस्तक वितरण के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले के अलग-अलग विकासखंडों में काम की रफ्तार बेहद असमान है. धरसींवा विकासखंड में पाठ्यपुस्तकों के वितरण का काम पूरी तरह से समाप्त कर लिया गया है, जबकि आरंग विकासखंड में यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. इसके विपरीत, रायपुर और अभनपुर विकासखंड में अभी तक वितरण की जमीनी शुरुआत भी ठीक से नहीं हो सकी है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि विभाग अभी केवल हाई स्कूलों तक ही पुस्तकें पहुंचा रहा है, जबकि प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में वितरण का काम पूरी तरह अटका हुआ है.
15 जून तक का लक्ष्य और बचा है बेहद कम समय, अब तक आधा काम भी नहीं हुआ पूरा
पाठ्यपुस्तक निगम ने आगामी 15 जून यानी स्कूलों के कपाट खुलने से ठीक पहले सभी शिक्षण संस्थानों में शत्-प्रतिशत किताबें पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है. कैलेंडर के हिसाब से देखें तो अब इस समय सीमा को पूरा करने के लिए केवल 12 दिन का समय ही शेष रह गया है. इतने कम समय में जिले के कोने-कोने में स्थित सभी स्कूलों तक खेप पहुंचाना नामुमकिन सा लग रहा है. खुद जिला मुख्यालय रायपुर में अब तक 50 फीसदी कार्य भी पूरा नहीं हो सका है, जिससे अधिकारी और स्कूल स्टाफ दोनों ही परेशान हैं.
अधिकारियों के दावों की खुली पोल, हर साल समय पर किताबें बांटने की घोषणाएं होती हैं हवा-हवाई
हर साल जब भी नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला होता है, तब शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक निगम की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं. अधिकारी मंचों से घोषणा करते हैं कि सत्र की शुरुआत के पहले ही दिन सभी बच्चों की मेज पर किताबें मौजूद रहेंगी ताकि उनकी पढ़ाई में एक दिन का भी व्यवधान न आए. जमीनी स्तर पर ये तमाम दावे और वादे हर बार पूरी तरह से हवा-हवाई साबित होते हैं. प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा उन गरीब बच्चों को भुगतना पड़ता है जो पूरी तरह सरकारी किताबों पर ही निर्भर हैं.
पिछले सत्र में भी सामने आई थी ऐसी ही लापरवाही, निजी स्कूलों ने डिपो से नहीं उठाई थी सामग्री
यह कोई पहली बार नहीं है जब रायपुर जिले के छात्रों को ऐसी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है. पिछले शैक्षणिक सत्र में भी बिल्कुल इसी तरह की भारी लापरवाही देखने को मिली थी. उस समय सरकारी तंत्र की सुस्ती के साथ-साथ निजी स्कूल संचालकों का अड़ियल रवैया भी सामने आया था. कई प्राइवेट स्कूल प्रबंधनों ने तो सत्र शुरू होने के महीनों बाद तक पाठ्यपुस्तक निगम के मुख्य डिपो से अपनी आरक्षित किताबों का स्टॉक तक नहीं उठाया था, जिसके कारण हजारों बच्चों का पूरा साल बिना किताबों के या पुरानी फटी किताबों के सहारे ही बीत गया था.
बिना किताबों के कैसे होगी पढ़ाई, शिक्षकों के सामने कोर्स समय पर पूरा करने की बड़ी चुनौती
अगर आने वाले एक हफ्ते के भीतर शिक्षा विभाग ने युद्ध स्तर पर काम करके किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की, तो स्कूलों में पढ़ाई शुरू होते ही अफरा-तफरी का माहौल बन जाएगा. बिना मुख्य पाठ्यपुस्तकों के शिक्षक बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर क्या और कैसे पढ़ाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है. इसके अलावा, सत्र के शुरुआती दिनों में ही पढ़ाई पिछड़ जाने के कारण शिक्षकों पर बाद में पाठ्यक्रम को जल्दी खत्म करने का भारी मानसिक दबाव रहता है. जानकारों का कहना है कि विभाग को अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेते हुए तुरंत अतिरिक्त गाड़ियां लगाकर पुस्तक वितरण पूरा करना चाहिए.



