
छत्तीसगढ़ शासन ने सरकारी खजाने के सही उपयोग के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के किसी भी सरकारी विभाग में 15 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक नई खरीदारी पर अस्थायी प्रतिबंध रहेगा। अक्सर यह देखा जाता है कि वित्तीय वर्ष के अंत में विभाग अपना बजट खत्म करने के चक्कर में ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं जिनकी तुरंत जरूरत नहीं होती। शासन ने इसी प्रवृत्ति पर लगाम कसने के लिए यह आदेश जारी किया है ताकि जनता का पैसा अनावश्यक रूप से अवरुद्ध न हो।
15 मार्च तक निपटाने होंगे पुराने भुगतान
वित्त विभाग के निर्देश के मुताबिक 15 फरवरी के बाद कोई भी नया ‘परचेज ऑर्डर’ (क्रय आदेश) जारी नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने समय सीमा भी तय कर दी है। जिन विभागों ने 15 फरवरी तक जायज खरीदारी कर ली है उन्हें अपने सभी बिलों का भुगतान 15 मार्च 2026 तक हर हाल में पूरा करना होगा। इस कदम से वित्त विभाग को साल के अंत में वित्तीय स्थिति को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अस्पताल, जेल और आश्रमों को मिली बड़ी राहत
सरकार ने इस पाबंदी के दौरान आम जनता की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा है। अस्पताल, जेल, छात्रावास और आश्रम जैसी जगहों पर भोजन, कपड़ा और दवाओं की खरीदी पर कोई रोक नहीं होगी। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण आहार के लिए खाद्यान्न की खरीद और परिवहन का काम भी पहले की तरह चलता रहेगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और लोक निर्माण जैसे तकनीकी विभागों की चालू परियोजनाओं के लिए जरूरी सामग्री की खरीद को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है।
केंद्रीय योजनाओं के कामों पर नहीं पड़ेगा असर
इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार की योजनाओं और विदेशी सहायता से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर यह नियम लागू नहीं होगा। नाबार्ड, सिडबी और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान से होने वाली खरीदारी भी जारी रहेगी। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि विकास कार्यों की गति धीमी न हो और केंद्र से मिलने वाली राशि का समय पर उपयोग हो सके। आवश्यक परिस्थितियों में किसी भी विभाग को खरीदारी के लिए वित्त विभाग से विशेष अनुमति लेनी होगी।
इन छोटे खर्चों पर भी बनी रहेगी छूट
रोजमर्रा के कामकाज को सुचारू रखने के लिए कुछ छोटी राहतें भी दी गई हैं। जैसे पेट्रोल-डीजल, गाड़ियों की मरम्मत, और 5000 रुपये तक की स्टेशनरी की खरीदारी पर रोक नहीं रहेगी। देशी मदिरा की खरीदी और पहले अनुपूरक बजट में स्वीकृत विशेष कार्यों को भी प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। कुल मिलाकर सरकार का इरादा केवल उन बड़ी और अनावश्यक खरीदारियों को रोकना है जो केवल बजट खपाने के उद्देश्य से की जाती हैं।


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