CG Board Exam: सावधान! बोर्ड परीक्षा में पास कराने के नाम पर ठग सक्रिय, माशिमं ने छात्रों और पालकों को किया आगाह

छत्तीसगढ़ में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे आने से पहले जालसाजों का गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तेजी से चल रहा है, जिसका दूसरा चरण 28 मार्च से शुरू हो चुका है। इसी बीच खबर आ रही है कि कुछ दलाल विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को फोन कर नंबर बढ़ाने या फेल विषय में पास कराने का झांसा दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी जारी की है कि छात्र ऐसे किसी भी प्रलोभन में न आएं, क्योंकि बोर्ड की पूरी प्रक्रिया गोपनीय और सुरक्षित होती है।

दलालों के झांसे में न आएं: माशिमं ने कहा- पैसे लेकर नंबर बढ़ाना मुमकिन नहीं

माशिमं के उप सचिव ने स्पष्ट किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच एक तय और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाती है। इसमें किसी भी बाहरी व्यक्ति या दलाल का हस्तक्षेप संभव नहीं है। मंडल ने अभिभावकों को सलाह दी है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को बोर्ड का अधिकारी बताकर पैसों की मांग करता है, तो तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाने में दें। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि ऐसे ठगों से उनका कोई वास्ता नहीं है और छात्र केवल अपनी मेहनत और सही मूल्यांकन पर ही भरोसा रखें।

ठगी का पुराना पैंतरा: फेल होने का डर दिखाकर वसूले जा रहे हैं पैसे

पिछले सालों के अनुभवों को देखें तो ठगों का तरीका काफी मिलता-जुलता रहता है। ये जालसाज विद्यार्थियों या पालकों को कॉल करके डराते हैं कि उनका बच्चा एक या दो विषयों में फेल हो गया है। इसके बाद वे ‘सेटिंग’ के जरिए पास कराने के नाम पर पांच से दस हजार रुपये की मांग करते हैं। घबराहट में कई बार लोग इन ठगों के बताए खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। मंडल ने आगाह किया है कि बोर्ड कभी भी किसी छात्र को व्यक्तिगत रूप से फोन करके नंबरों की जानकारी नहीं देता है।

गोपनीय मूल्यांकन प्रक्रिया: सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच जांची जा रही हैं कॉपियां

प्रदेश भर में कॉपियों के मूल्यांकन का दूसरा चरण युद्ध स्तर पर जारी है। बोर्ड ने मूल्यांकन केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी निष्पक्षता से अंक प्रदान करें। पूरी कोडिंग और डिकोडिंग प्रक्रिया इतनी गुप्त होती है कि जांचने वाले शिक्षक को भी यह पता नहीं होता कि वह किस छात्र की कॉपी जांच रहा है। ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा नंबर बढ़वाने का दावा पूरी तरह खोखला और फर्जी है।

जागरूक रहें अभिभावक: संदिग्ध कॉल आने पर पुलिस को दें जानकारी

शिक्षा मंडल ने पालकों से अपील की है कि वे परीक्षा परिणामों को लेकर धैर्य बनाए रखें। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इन तत्वों को बेनकाब करने के लिए जनता का सहयोग जरूरी है। यदि आपके पास भी ऐसा कोई संदिग्ध फोन आता है, तो उस नंबर को ब्लॉक करें और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं। बोर्ड का कहना है कि वे तकनीकी तौर पर भी सुरक्षा बढ़ा रहे हैं ताकि छात्रों का डेटा सुरक्षित रहे और अपराधी उनके मोबाइल नंबरों तक न पहुंच सकें।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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