
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य के गौधामों की बदहाली पर कड़ा रुख अपनाया है. हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि गौधाम केवल कागजों तक सीमित न रहें. कोर्ट ने मीडिया में आई खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है. बेंच का कहना है कि सड़कों पर घूमते मवेशियों के कारण मानव जीवन को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और इसे रोकने के लिए धरातल पर ठोस इंतजाम जरूरी हैं.
हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान, पशुधन विभाग के सचिव को थमाया नोटिस
हाई कोर्ट ने लाखासार गौधाम में गायों की दुर्दशा से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है. इस मामले में डिवीजन बेंच ने पशुधन विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया है. कोर्ट ने शासन को निर्देश दिया है कि वह मवेशियों के लिए चारा, पानी और चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था का विवरण पेश करे. मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को तय की गई है जिसमें विभाग को अपनी तैयारियों और जमीनी हकीकत की जानकारी देनी होगी.
25 एकड़ का गौधाम लेकिन 10 फीट के कमरे में कैद 200 गायें
लाखासार गांव में 25 एकड़ क्षेत्र में फैले गौधाम की जमीनी सच्चाई सरकारी दावों से बिल्कुल अलग है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वहां 205 से अधिक गायों को 10 गुणा 26 फीट के एक बेहद छोटे कमरे में ठूंसकर रखा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि एक मवेशी के लिए कम से कम 30 से 40 वर्गफुट की ढकी हुई जगह होनी चाहिए. क्षमता से कई गुना ज्यादा गायों को एक साथ रखने की वजह से वहां पशुओं का दम घुटने का खतरा बना हुआ है.
भूखी-प्यासी गायें और बदहाल व्यवस्था की खुली पोल
गौधाम में न केवल जगह की कमी है बल्कि चारा और पानी का भी भारी संकट देखा गया है. निरीक्षण के दौरान पशुओं के लिए बनाया गया कोटना पूरी तरह खाली पाया गया. वहां मौजूद चौकीदार ने बताया कि 200 से ज्यादा मवेशियों के लिए मिलने वाला पैरा बहुत कम है. 25 एकड़ के विशाल परिसर की देखरेख के लिए सरकार ने महज एक चौकीदार नियुक्त किया है जो 12 हजार रुपए के वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी करने को मजबूर है.
सड़कों पर मवेशियों का डेरा और प्रशासन के खोखले दावे
सड़कों को मवेशी मुक्त करने के प्रशासनिक दावे धरातल पर फेल होते नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सकरी से लाखासार के बीच केवल 7 किलोमीटर की दूरी में ही 150 से अधिक मवेशी सड़क पर बैठे मिले. जिले में इस समय घुमंतु मवेशियों की कुल संख्या 14 हजार से ज्यादा बताई जा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौधाम में सिर्फ दान किए गए पशु रखे जा रहे हैं जबकि आवारा घूमने वाले स्थानीय जानवरों के मालिक उन्हें वहां भेजने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं.
‘मानव जीवन को खतरा न हो’, कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चिंता जताई कि सड़कों पर मवेशियों के बैठने से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि गौधामों का रख-रखाव सही तरीके से होना चाहिए ताकि सार्वजनिक जगहों पर मवेशियों का विचरण कम हो सके. सरकार को यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि गौधामों में चारे और पानी के पुख्ता इंतजाम हों जिससे मवेशी बाहर न भटकें. मवेशियों के उचित प्रबंधन से ही सड़कों पर चलने वाले इंसानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.
14 मई को होगी अगली सुनवाई और सरकार को देना होगा जवाब
हाई कोर्ट ने 14 मई की तारीख तय करते हुए सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह गौधामों की व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा. शासन को अब यह साबित करना होगा कि वह लाखासार जैसे केंद्रों में सुधार के लिए क्या कदम उठा रहा है. आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार सड़कों को मवेशी मुक्त करने और गौधामों की स्थिति सुधारने के लिए कितनी गंभीर है.



