
छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान आज एक महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरा हुआ है। सदन ने छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के तहत अब राज्य की महिलाएं अपनी सहमति से नाइट शिफ्ट में भी काम कर सकेंगी। इसके लिए उन्हें केवल एक सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। सरकार के इस कदम का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को अधिक अवसर देना और श्रम बाजार में उनकी भागीदारी को बढ़ाना है
ओवरटाइम की सीमा में बढ़ोतरी और 10 घंटे की ड्यूटी
नए संशोधनों के लागू होने के बाद कर्मचारियों के काम करने के घंटों में भी बदलाव किया गया है। अब कर्मचारी एक दिन में 9 घंटे की जगह 10 घंटे तक काम कर सकेंगे। साथ ही ओवरटाइम की अवधि को भी एक तिमाही में 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दिया गया है। इससे कंपनियों और संस्थानों को अपने कामकाज के प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा और कर्मचारियों को अतिरिक्त कमाई का मौका भी मिल सकेगा।
छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत और रजिस्ट्रेशन के नियम आसान
छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए अब 20 कर्मचारियों तक वाले संस्थानों को अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने व्यापार को आसान बनाने के लिए गुमाश्ता यानी दुकान पंजीयन की प्रक्रिया को भी सरल कर दिया है। अब यह ट्रेड लाइसेंस के रूप में जिला श्रम कार्यालय से जारी किया जाएगा जिससे व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता आएगी। पहले यह सीमा केवल 10 कर्मचारियों तक सीमित थी जिसे अब बढ़ा दिया गया है।
सुरक्षा और सहमति के आधार पर लागू होंगे नए प्रावधान
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं को रात की पाली में ड्यूटी पर रखने के दौरान उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना अनिवार्य होगा। रात 10 बजे के बाद काम करने के लिए महिला कर्मी की लिखित सहमति सबसे जरूरी शर्त है। यह नया नियम सुरक्षा और स्वेच्छा के संतुलन पर आधारित है ताकि कामकाजी माहौल सुरक्षित रहे। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इन बदलावों से राज्य में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी।



