
PM ASHA Yojana: प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। सरकार ने रबी फसलों के पंजीयन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। अब चना, मसूर और सरसों की खेती करने वाले किसान 20 अप्रैल 2026 तक अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इससे पहले आवेदन की आखिरी तारीख 31 मार्च तय की गई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों और किसानों की मांग को देखते हुए प्रशासन ने तारीख बढ़ाने का फैसला लिया है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल रखी गई है।
पंजीयन के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल (kisan.cg.nic.in) पर अपना विवरण दर्ज कराना होगा। किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के जरिए सेवा सहकारी समितियों में आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ कुछ जरूरी कागजात देना अनिवार्य है:
- ऋण पुस्तिका (बी-1 और पी-II)
- आधार कार्ड की फोटोकॉपी
- बैंक पासबुक की छायाप्रति
जिन किसानों की गिरदावली या फसल का विवरण पोर्टल पर अधूरा है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में पटवारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र मान्य होगा। इसी सत्यापन के आधार पर समितियां उपज की खरीदी करेंगी।
MSP पर होगी खरीदी, नेफेड संभालेगा जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी स्पष्ट कर दिया है। इस साल चने के लिए 5875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर के लिए 7000 रुपये और सरसों के लिए 6500 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की गई है। खरीदी की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी नेफेड (NAFED) को सौंपी गई है। जिले में उपार्जन के लिए विशेष केंद्र बनाए गए हैं, जैसे मोहला विकासखंड की गोटाटोला और चौकी विकासखंड की आमाटोला समिति। इन केंद्रों पर सोमवार से शुक्रवार तक किसान अपनी उपज बेच सकेंगे।
प्रति एकड़ खरीदी की सीमा और नियम
सरकार ने योजना के तहत पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रति एकड़ खरीदी की एक सीमा भी तय की है। इसके अनुसार, एक एकड़ रकबे पर अधिकतम 6 क्विंटल चना, 2 क्विंटल मसूर और 5 क्विंटल सरसों ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि छोटे और सीमांत किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके और बिचौलिए इस प्रक्रिया का लाभ न उठा सकें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द अपनी समितियों में संपर्क करें ताकि उपार्जन के समय किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।



