
India Petrol Diesel LPG Price Hike: नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और तेल कंपनियों को हो रहे घाटे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
मंत्रालय और तेल कंपनियों के बीच बैठकों का दौर शुरू
ईंधन के दामों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार के भीतर हलचल तेज हो गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शीर्ष अधिकारियों के बीच लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं। इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र कच्चे तेल की बढ़ती लागत और तेल कंपनियों के वित्तीय नुकसान की भरपाई करना है। हालांकि सरकार ने अभी तक कीमतों में इजाफे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो बढ़ोत्तरी को टालना मुश्किल होगा।
सरकारी खजाने और तेल कंपनियों पर बढ़ता भारी बोझ
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए बताया कि सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल और गैस महंगे दामों पर खरीद रही हैं, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए इसे कम कीमत पर बेचा जा रहा है। इस अंतर के कारण तेल कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, उत्पाद शुल्क में कटौती की वजह से सरकार को हर महीने करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि कंपनियों की अनुमानित अंडर-रिकवरी 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से बिगड़ा आपूर्ति का गणित
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब तीसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस तनाव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है। ईरान द्वारा इस रास्ते पर लगाए गए प्रतिबंधों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी एलपीजी और कच्चे तेल की जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है। आपूर्ति बाधित होने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।
पीएम मोदी की अपील: मेट्रो का इस्तेमाल करें और ईंधन बचाएं
देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचाने की दिशा में सहयोग मांगा है। उन्होंने लोगों को निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। पीएम ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे विदेशों से आने वाले महंगे ईंधन पर भारत की निर्भरता कम होगी। साथ ही, उन्होंने कॉर्पोरेट जगत को सुझाव दिया कि जहां संभव हो वहां ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा दें ताकि सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही कम हो और तेल की खपत घट सके।
ट्रंप के सख्त रुख से शांति की उम्मीदों को लगा झटका
वैश्विक राजनीति में शांति की कोशिशों को तब बड़ा धक्का लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के संघर्ष विराम प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताकर खारिज कर दिया। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से चढ़ने लगी हैं। शांति प्रयासों के विफल होने से यह साफ हो गया है कि ऊर्जा संकट अभी लंबा खिंच सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती वाली है, क्योंकि यहां बढ़ती तेल की कीमतें सीधे तौर पर महंगाई और माल ढुलाई की लागत को प्रभावित करती हैं।
उपभोक्ताओं पर महंगाई का बढ़ता साया
अगर आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। डीजल की कीमतें बढ़ने से फल, सब्जी और अनाज की ढुलाई महंगी हो जाती है, जिससे आम आदमी की थाली पर सीधा असर पड़ता है। फिलहाल सरकार मुद्रास्फीति (महंगाई दर) और राजकोषीय घाटे के बीच एक महीन लकीर पर चल रही है। अब सबकी नजरें पेट्रोलियम मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार बढ़ती कीमतों का बोझ खुद उठाएगी या इसे उपभोक्ताओं के कंधों पर डालेगी।



