छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टे का मायाजाल: महादेव के बाद अब गजानंद और अरुण शक्ति ऐप सक्रिय, छोटे शहर बने नए अड्डे

छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार अब बड़े शहरों की चकाचौंध से निकलकर गांव-गांव तक अपनी जड़ें जमा चुका है। महादेव बुक जैसे चर्चित ऐप पर हुई सख्ती के बाद अब बाजार में गजानंद और अरुण शक्ति जैसे नए नामों से सट्टेबाजी के प्लेटफॉर्म धड़ल्ले से चल रहे हैं। तिल्दा-नेवरा, भाटापारा, आरंग और महासमुंद जैसे छोटे शहरों में युवाओं के बीच यह लत तेजी से फैल रही है। आगामी आईपीएल सीजन को देखते हुए बड़े सटोरिये और खाईवाल फिर से सक्रिय हो गए हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियों की सख्ती के बावजूद पर्दे के पीछे से इस काले कारोबार का नेटवर्क लगातार विस्तार पा रहा है।

छोटे शहरों में सट्टे की पैठ: तिल्दा से लेकर धमतरी तक फैला जाल

कभी रायपुर और दुर्ग तक सीमित रहने वाला ऑनलाइन सट्टा अब प्रदेश के भीतरी इलाकों तक पहुंच गया है। बलौदाबाजार, गोबरानवापारा और धमतरी जैसे इलाकों में सट्टेबाजी के छोटे-छोटे केंद्र खुल गए हैं। महादेव बुक की तर्ज पर ही नए बेङ्क्षटग ऐप काम कर रहे हैं, जो युवाओं को रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाकर जाल में फंसाते हैं। इन ऐप्स का इंटरफेस इतना आसान है कि कम पढ़े-लिखे युवा भी आसानी से पैसा लगा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सक्रिय एजेंट अब क्लब संचालकों और कबाड़ कारोबारियों के जरिए अपना नेटवर्क चला रहे हैं, जिससे पुलिस के लिए मुख्य सरगना तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है।

चेहरों के पीछे छिपे असली खिलाड़ी: रसूखदारों की शह पर चल रहा खेल

रायपुर में महादेव बुक चलाने वाले कई बड़े एजेंट आज भी सक्रिय हैं, लेकिन उन्होंने अपना काम करने का तरीका बदल लिया है। ईडी और सीबीआई की लगातार कार्रवाई के डर से अब बड़े खाईवाल सीधे सामने नहीं आते। उन्होंने नए और अनजान चेहरों को मोहरा बनाकर पैनल संचालन का काम सौंप दिया है। आईडी और मुख्य सर्वर पुराने रसूखदारों का ही होता है, लेकिन कागजों पर वे कहीं नजर नहीं आते। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध कारोबार को फलने-फूलने में कुछ सफेदपोश नेताओं और पुलिसकर्मियों की भी संदिग्ध भूमिका रही है।

काली कमाई का निवेश: हवाला के जरिए जमीन और मकानों में खपाया पैसा

महादेव बुक के संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल पर शिकंजा कसने के बाद जांच एजेंसियों ने उनकी करोड़ों की संपत्ति अटैच की है। सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि सट्टे से होने वाली अरबों की कमाई को हवाला के जरिए देश-विदेश में खपाया गया है। छत्तीसगढ़ में इस रकम का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट कारोबार, आलीशान मकानों और बेनामी जमीनों की खरीद-फरोख्त में लगाया गया। सट्टेबाजी का यह पैसा केवल हार-जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने प्रदेश की अर्थव्यवस्था में समानांतर काले धन का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया है।

जेल से छूटते ही दुबई रवानगी: सटोरियों का सेफ हेवन बना विदेश

कानूनी कार्रवाई के बाद भी सटोरियों के हौसले पस्त नहीं हो रहे हैं। आजाद चौक इलाके का बड़ा सटोरिया सौफी, जिसे क्राइम ब्रांच ने पैनल चलाते पकड़ा था, जमानत मिलते ही दोबारा दुबई फरार हो गया है। इसी तरह दुबई से लौटे खेमानी बंधु भी फिर से सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनका नाम कबीर नगर थाने के पुराने मामलों में दर्ज है। सटोरियों के लिए दुबई एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है, जहां बैठकर वे भारत में अपने गुर्गों के जरिए मोबाइल ऐप्स को ऑपरेट करते हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी न हो पाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

आईपीएल पर सट्टेबाजों की नजर: पुलिस ने भी कसी कमर

जैसे-जैसे आईपीएल 2026 के मुकाबले करीब आ रहे हैं, सट्टा बाजार में हलचल तेज हो गई है। खाईवालों ने नए पैनल और आईडी बांटना शुरू कर दिया है। रायपुर पुलिस और साइबर सेल ने भी इस बार तकनीकी निगरानी बढ़ाने का दावा किया है। संदिग्ध बैंक खातों और ट्रांजैक्शन पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जो लोग पर्दे के पीछे से नए मोहरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनकी कुंडली तैयार की जा रही है। सरकार और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि सट्टे की यह लत युवाओं के भविष्य और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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