
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में खाद की कमी का फायदा उठाकर किसानों को ठगने वाला एक नया गिरोह सक्रिय हो गया है। जिले के मस्तूरी क्षेत्र में कुछ संदिग्ध एजेंट खुद को एक निजी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर भोले-भाले किसानों को अपना शिकार बना रहे हैं। ये जालसाज बाकायदा रसीद काटकर रजिस्ट्रेशन के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं। जैसे ही कुछ जागरूक ग्रामीणों ने इन एजेंटों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और दस्तावेज मांगे, वे मौका पाकर वहां से रफूचक्कर हो गए।
रमसा बायोटेक के नाम पर वसूली, मास्टरमाइंड फरार
मस्तूरी क्षेत्र में ठगी का यह चौंकाने वाला मामला ‘रमसा बायोटेक’ नामक कंपनी के नाम पर सामने आया है। संदिग्ध एजेंट किसानों के पास पहुंचकर उन्हें सीधे कंपनी से खाद दिलाने का झांसा देते हैं और इसके बदले 1500 रुपये की मांग करते हैं। विश्वसनीयता बनाने के लिए ये ठग बाकायदा रसीद भी थमा देते हैं, जिससे पहली नजर में ग्रामीणों को यह पूरी प्रक्रिया सरकारी या वैध लगती है। घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें दो युवक बाइक पर सवार होकर पैसे मांगते दिख रहे हैं।
जागरूक किसान ने खोली पोल, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब एक सतर्क किसान ने इन एजेंटों से कंपनी का विवरण और पंजीकरण संबंधी आधिकारिक कागजात दिखाने को कहा। सवाल सुनते ही दोनों युवक घबरा गए और खुद को कंपनी का प्रचारक बताने का बहाना करने लगे। जब उन्हें लगा कि वे फंस सकते हैं, तो वे अपनी बाइक लेकर तुरंत वहां से भाग निकले। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि उनके पास ‘रामसा बायोटेक’ लिखी पर्चियां मौजूद थीं।
खाद की किल्लत का फायदा उठा रहे अपराधी
छत्तीसगढ़ में खेती का सीजन शुरू होते ही खाद की मांग बढ़ जाती है और कई बार केंद्रों पर खाद के लिए मारामारी की नौबत आ जाती है। इसी किल्लत और मजबूरी का फायदा उठाकर ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पिछले साल भी इसी तरह का मामला सामने आया था जब कुछ लोग सीधे कंपनी से खाद भेजने का वादा करके पैसे लेकर चंपत हो गए थे। प्रशासन को आशंका है कि इस बार भी कई किसान इनकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके होंगे।
नकली रसीद और फर्जी कंपनी का मायाजाल
ठगों ने अब अपना तरीका बदल लिया है ताकि वे असली सरकारी कर्मचारी या अधिकृत एजेंट लग सकें। वे नकली रसीद बुक का इस्तेमाल करते हैं और भरोसेमंद दिखने वाले तरीके अपनाकर ग्रामीणों को भ्रमित करते हैं। चूंकि किसान को खाद की सख्त जरूरत होती है, इसलिए वह बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए भुगतान कर देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह गिरोह अब पैर पसार रहा है, जो कृषि विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कृषि विभाग और प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी नाक के नीचे इस तरह की अवैध वसूली का खेल चल रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कृषि विभाग की जिम्मेदारी है कि वह गांवों में जागरूकता अभियान चलाए ताकि किसान इन शिकारियों के जाल में न फंसें। बहरहाल, इस ताजा घटना के बाद अब पुलिस और संबंधित विभाग को इन फर्जी एजेंटों की तलाश में जुटना होगा ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों को पकड़ा जा सके。
किसानों के लिए जरूरी सावधानी: ऐसे बचें ठगी से
ठगी से बचने के लिए किसानों को कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे:
- किसी भी अज्ञात व्यक्ति या निजी एजेंट को नकद भुगतान करने से पहले उसकी आईडी और आधिकारिक दस्तावेज जरूर चेक करें।
- खाद और बीज की खरीदारी केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त केंद्रों या अधिकृत दुकानों से ही करें।
- यदि कोई सीधे घर आकर सस्ते दाम पर खाद का लालच देता है, तो तुरंत अपने क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) को सूचित करें।
- संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन से संपर्क करें।



