
CG Electricity Bill Hike: छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला महीना जेब पर भारी पड़ सकता है. राज्य पावर कंपनी ने टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है जिससे संकेत मिल रहे हैं कि जून से बिजली की नई दरें लागू हो सकती हैं. हालांकि आयोग ने अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है लेकिन कंपनी द्वारा पेश किए गए आंकड़ों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है.
जून से लागू हो सकती हैं बिजली की नई दरें
छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर हलचल तेज हो गई है. संकेत मिल रहे हैं कि जून महीने से नया टैरिफ प्रभावी हो सकता है. राज्य पावर कंपनी द्वारा पेश किए गए हजारों करोड़ के घाटे के दावों ने बिजली नियामक आयोग के सामने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है कि दरों में कितनी वृद्धि की जाए.
6300 करोड़ के घाटे की भरपाई की तैयारी
राज्य पावर कंपनी ने नियामक आयोग के सामने करीब 6300 करोड़ रुपये के घाटे का दावा पेश किया है. कंपनी का कहना है कि इस बड़े वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए दरों में बढ़ोतरी करना जरूरी है. फरवरी में हुई जनसुनवाई के बाद से ही आयोग इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और अब मंथन अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है कि उपभोक्ताओं पर कम से कम बोझ कैसे डाला जाए.
लाभ के आंकड़ों के बीच पुराने घाटे का पेंच
कंपनी द्वारा दिए गए वित्तीय ब्यौरे में कुछ विरोधाभास भी देखने को मिल रहे हैं. साल 2026-27 के लिए कंपनी ने करीब 26,216 करोड़ रुपये की आय का अनुमान जताया है जबकि खर्च 25,460 करोड़ रुपये रहने की बात कही है. इस लिहाज से कंपनी को मुनाफा होना चाहिए लेकिन पुराने वर्षों के घाटे को शामिल करने के बाद कुल जरूरत 32,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है जिससे स्थिति जटिल हो गई है.
दरों में 20 फीसदी तक की बड़ी बढ़ोतरी संभव
अगर बिजली नियामक आयोग कंपनी के घाटे से जुड़े दावों को पूरी तरह स्वीकार कर लेता है तो दरों में 20 प्रतिशत तक का बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. यह बढ़ोतरी आम जनता के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगी. पिछले साल आयोग ने केवल 500 करोड़ का घाटा माना था जिससे कीमतों में मात्र 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी लेकिन इस बार घाटे का आंकड़ा कई गुना ज्यादा है.
गर्मी के मौसम में बिगड़ेगा आम आदमी का बजट
बिजली की बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है. भीषण गर्मी के इस मौसम में वैसे भी बिजली की खपत बढ़ जाती है और ऐसे में टैरिफ महंगा होने से लोगों के घर का बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है. औद्योगिक सेक्टर भी इस संभावित वृद्धि को लेकर काफी आशंकित नजर आ रहा है क्योंकि इससे उत्पादन लागत बढ़ जाएगी.
नियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरी गेंद अब बिजली नियामक आयोग के पाले में है. आयोग को एक तरफ पावर कंपनी की आर्थिक सेहत सुधारनी है तो दूसरी तरफ मध्यम वर्ग को महंगाई की मार से भी बचाना है. आने वाले कुछ दिनों में आयोग की ओर से स्थिति पूरी तरह साफ कर दी जाएगी कि प्रदेश की जनता को कितनी महंगी बिजली मिलेगी.



