
छत्तीसगढ़ में चल रही विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया के बीच मतदाता सूची को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। राज्यभर में 82,759 मतदाताओं को फिलहाल संदिग्ध मानते हुए ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में रखा गया है। यह स्थिति 13 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित है। अधिकारियों का कहना है कि इन सभी मामलों की दोबारा जांच की जा रही है।
बिलासपुर जिले के 5,077 मतदाता जांच के दायरे में
बिलासपुर जिले की छह विधानसभा सीटों से 5,077 आवेदन ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। इन आवेदनों में अलग-अलग तरह की खामियां पाई गई हैं, जिसके कारण इन्हें फिलहाल अंतिम सूची में शामिल नहीं किया गया है। जिले के निर्वाचन अधिकारी इन सभी मामलों की विस्तार से समीक्षा कर रहे हैं।
दस्तावेजों की कमी और तकनीकी त्रुटियां मुख्य वजह
जांच में सामने आया है कि कई आवेदनों में जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं थे। कुछ मामलों में दोहरी प्रविष्टि मिली है तो कहीं आयु से जुड़ी गड़बड़ी पाई गई। कई आवेदकों के निवास प्रमाण पत्र में भी त्रुटियां सामने आई हैं। इन कारणों से प्रारंभिक सत्यापन के दौरान नामों को रोक दिया गया।
पात्र पाए जाने पर सूची में शामिल होने का मौका
निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि जिन आवेदकों के दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें सुधार का अवसर दिया जा सकता है। यदि दोबारा जांच में वे पात्र पाए जाते हैं तो उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। अंतिम आंकड़े जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने नाम बरकरार रहेंगे और कितने हटाए जाएंगे।
प्रदेश की 90 सीटों पर चल रही है प्रक्रिया
राज्य की सभी 90 विधानसभा सीटों पर यह विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाया गया। इसका मकसद मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। अधिकारी मानते हैं कि सही सूची तैयार होने से चुनाव के दौरान विवाद और शिकायतों की संभावना कम होगी।
मतदाताओं से अपील, अपनी स्थिति जरूर जांचें
प्रशासन ने मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे अपनी प्रविष्टि की स्थिति स्वयं जांच लें। यदि नाम, आयु या पते में कोई गलती हो तो तुरंत निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें। समय रहते सुधार होने पर भविष्य में मतदान के अधिकार को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इस कवायद का उद्देश्य यही है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव बिना विवाद और सुचारू ढंग से संपन्न हो सकें।



