
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बंजारी में एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां स्थित सेंट आस इंग्लिश मीडियम स्कूल के पास संचालित एक डामर फैक्ट्री मासूम बच्चों और शिक्षकों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन गई है। पिछले कई दिनों से इस फैक्ट्री की चिमनियों से लगातार घना काला धुआं निकल रहा है, जिसने पूरे स्कूल परिसर को अपनी चपेट में ले लिया है। जहरीली हवा के कारण बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, जिससे मजबूरन स्कूल प्रबंधन को समय से पहले ही छुट्टी घोषित करनी पड़ रही है।
जहरीली गैसों का घेरा: कार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड से बिगड़ रही सेहत
फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें शामिल हैं। ये गैसें न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि स्कूल के छोटे बच्चों के फेफड़ों पर भी सीधा असर डाल रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि कक्षा के भीतर भी धुएं की गंध और राख के कण पहुंच रहे हैं, जिससे बच्चों को आंखों में जलन और खांसी की शिकायत हो रही है। पढ़ाई के माहौल के बजाय अब स्कूल में केवल बीमारी का डर बना हुआ है, जिससे अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
समय से पहले छुट्टी की नौबत: पढ़ाई छोड़कर घर भागने को मजबूर छात्र
प्रदूषण की स्थिति इतनी विकट हो गई है कि स्कूल का संचालन करना असंभव होता जा रहा है। जब हवा का रुख स्कूल की ओर होता है और धुआं घना हो जाता है, तो स्कूल प्रबंधन के पास बच्चों को घर भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। निर्धारित समय से पहले छुट्टी होने के कारण छात्रों का शैक्षणिक सत्र और पाठ्यक्रम पिछड़ रहा है। स्कूल प्रशासन ने कई बार स्थानीय स्तर पर इसकी मौखिक शिकायत की है, लेकिन धुएं का निकलना बंद नहीं हुआ है। यह स्थिति दर्शाती है कि व्यावसायिक लाभ के आगे बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य को दांव पर लगा दिया गया है।
नियमों की सरेआम धज्जियां: रिहायशी और शैक्षणिक क्षेत्र में फैक्ट्री का संचालन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार, किसी भी डामर फैक्ट्री या भारी प्रदूषण फैलाने वाली इकाई को स्कूल, अस्पताल या घनी आबादी वाले क्षेत्र से एक तय दूरी पर होना अनिवार्य है। बंजारी में इस डामर फैक्ट्री का स्कूल के बिल्कुल समीप होना सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है। फैक्ट्री के पास प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी आधुनिक फिल्टर और ऊंची चिमनियां भी नजर नहीं आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर इस फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कहीं भी पालन नहीं हो रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर समस्या पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग अब तक मौन हैं। न तो फैक्ट्री की जांच की गई है और न ही प्रदूषण कम करने के लिए कोई नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की इस सुस्ती से स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने का इंतजार कर रहा है। यदि जल्द ही इस फैक्ट्री पर कार्रवाई नहीं की गई या इसे यहां से स्थानांतरित नहीं किया गया, तो ग्रामीण चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।



