SIR in CG: मतदाता सूची पुनरीक्षण के बीच पहचान की लड़ाई: इस गांव के 118 आदिवासी आधार कार्ड से वंचित

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM): एक ओर छत्तीसगढ़ राज्य अपने गठन की रजत जयंती मना रहा है, छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है वहीं दूसरी ओर गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ ग्राम ढपनीपानी के सैकड़ों आदिवासी परिवार आज भी अपनी मूलभूत पहचान और सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मरवाही जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव के 118 धनुहार जनजाति के आदिवासियों का अब तक आधार कार्ड और वोटर आईडी नहीं बन पाया है।

पहचान पत्र न होने से सरकारी योजनाओं से वंचित

ढपनीपानी के इन 118 आदिवासियों के पास पहचान पत्र न होने के कारण उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वे कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं:

  • राशन और खाद्य सुरक्षा: पहचान पत्रों के अभाव में उन्हें राशन कार्ड नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले अनाज की सुविधा से वंचित हैं।
  • वित्तीय और सामाजिक लाभ: वे बैंक खाता खोलने, पेंशन योजना का लाभ लेने और किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता तक पहुँचने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

वोटर आईडी और पुनरीक्षण प्रक्रिया से भी बाहर

राज्य में आज यानी मंगलवार, 4 नवंबर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं। लेकिन ढपनीपानी के ये 118 आदिवासी, जिनके पास वोटर आईडी ही नहीं है, वे इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से भी बाहर हैं।

स्वच्छ पेयजल का भी अभाव

पहचान की इस बुनियादी समस्या के साथ-साथ, ढपनीपानी के ग्रामीण शुद्ध पेयजल की अनुपलब्धता से भी जूझ रहे हैं।

  • जलस्रोत की समस्या: ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नलजल योजना या हैंडपंप जैसी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।
  • गंदा पानी पीने को विवश: मजबूरी में ग्रामीण ढोढ़ी (तालाबनुमा जलस्रोत) का गंदा पानी पीने को विवश हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं।

कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन और चुनावी वादे

ग्रामवासियों ने वर्षों से विभिन्न अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अपनी व्यथा सुनाई है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। आज ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की है।

  • चुनावी वादे: ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नेता उनके घरों तक पहुंचकर वादे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही ये वादे भुला दिए जाते हैं।
  • भविष्य की उम्मीद: अब जबकि राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन पहचान-विहीन परिवारों तक पहुँचकर उन्हें लोकतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ पाएगा या नहीं। यदि उन्हें आधार और वोटर आईडी जैसी मूलभूत पहचान मिलती है, तो उनकी सरकारी योजनाओं तक पहुँच सुनिश्चित होगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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