
Rajya Sabha Panel: राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन के उपाध्यक्षों के पैनल का नए सिरे से गठन किया है। इस नई समिति में विभिन्न राजनीतिक दलों के छह प्रमुख सदस्यों को जगह दी गई है। खास बात यह है कि इस पैनल में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम को भी शामिल किया गया है। यह पुनर्गठन 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। सभापति द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में बताया गया है कि यह समिति सदन के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
छह सदस्यों की नई समिति का हुआ एलान
राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इस बार उपाध्यक्षों के पैनल में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। समिति में शामिल होने वाले सदस्यों में भारतीय जनता पार्टी से दिनेश शर्मा, एस फांगनोन कोन्याक और घनश्याम तिवारी के नाम शामिल हैं। वहीं विपक्षी और क्षेत्रीय दलों की ओर से कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, एआईएडीएमके के एम थंबीदुरई और बीजेडी के सस्मित पात्रा को नामांकित किया गया है। यह सभी सदस्य सभापति और उपसभापति की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही का संचालन करेंगे।
उपसभापति पद के लिए 17 अप्रैल को होगा चुनाव
सदन में उपसभापति का पद रिक्त होने के कारण अब इसे भरने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। अधिसूचना के मुताबिक उपसभापति पद के लिए चुनाव 17 अप्रैल को सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सदन के सभी सदस्य अपने मत का प्रयोग करेंगे। संसदीय गलियारों में चर्चा है कि इस बार भी पुराने चेहरे पर ही भरोसा जताया जा सकता है। निर्वाचन की पूरी प्रक्रिया सभापति की निगरानी में संपन्न होगी जिसके बाद नवनिर्वाचित उपसभापति अपना कार्यभार संभालेंगे।
हरिवंश नारायण सिंह को फिर मिल सकती है जिम्मेदारी
राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह के नाम की चर्चा सबसे तेज है। संभावना जताई जा रही है कि उन्हें एक बार फिर इस पद के लिए मनोनीत किया जा सकता है। हरिवंश इससे पहले लगातार दो कार्यकालों तक इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा चुके हैं। 9 अप्रैल को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें फिर से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। वे हाल ही में सदन की सदस्यता की शपथ भी ले चुके हैं जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।
सदन के संचालन में पैनल की अहम भूमिका
राज्यसभा के नियमों के अनुसार जब सभापति और उपसभापति दोनों सदन में उपस्थित नहीं होते हैं तब उपाध्यक्षों के पैनल का कोई एक सदस्य सदन की अध्यक्षता करता है। पैनल में शामिल सदस्यों के पास वे सभी शक्तियां होती हैं जो पीठासीन अधिकारी के पास होती हैं। फूलो देवी नेताम के इस पैनल में शामिल होने से छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व उच्च सदन के संचालन मंडल में बढ़ा है। यह समिति सदन के विधायी कार्यों और चर्चाओं को मर्यादित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद करती है।
राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश
इस पैनल के पुनर्गठन में जिस तरह से अलग-अलग राज्यों और दलों के सांसदों को मौका दिया गया है वह भविष्य के राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है। बीजेपी ने जहां अपने अनुभवी चेहरों को आगे रखा है वहीं क्षेत्रीय दलों को भी पर्याप्त स्थान दिया गया है। छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम को शामिल करना महिला प्रतिनिधित्व और आदिवासी अंचल की आवाज को प्रमुखता देने के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजरें 17 अप्रैल को होने वाले चुनाव पर टिकी हैं कि सदन का अगला उपसभापति कौन होगा।



