
CG Mahasamund LPG Gas Theft Scam Arrest: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एलपीजी गैस चोरी के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने लगभग 1.5 करोड़ रुपये के इस घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए खाद्य विभाग के दो आला अधिकारियों और एक गैस एजेंसी संचालक को सलाखों के पीछे भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और गौरव गैस एजेंसी के मालिक पंकज चंद्राकर शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पंकज चंद्राकर पूर्व राज्य मंत्री पूनम चंद्राकर का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। पुलिस अब इस घोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए फरार अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी
महासमुंद पुलिस ने इस घोटाले की गहराई से जांच करने के बाद तीन मुख्य किरदारों को दबोचा है। इस पूरे खेल में सरकारी संरक्षण और रसूखदारों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है।
- अजय यादव: जिला खाद्य अधिकारी, महासमुंद।
- मनीष यादव: सहायक खाद्य अधिकारी।
- पंकज चंद्राकर: गौरव गैस एजेंसी संचालक (पूर्व मंत्री पूनम चंद्राकर का रिश्तेदार)।
- बड़ी जब्ती: सात एलपीजी टैंकर, 100 सिलेंडर और कंप्यूटर सहित अहम दस्तावेज बरामद।
सिंघोड़ा बॉर्डर पर पकड़े गए थे गैस से भरे छह ट्रक
इस घोटाले की परतें साल 2025 में खुलनी शुरू हुई थीं। सिंघोड़ा थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान 90 मीट्रिक टन एलपीजी गैस से लदे छह ट्रक पकड़े थे। चालक और संचालक इन ट्रकों से जुड़े कोई भी वैध कागजात नहीं दिखा पाए। चूंकि ज्वलनशील गैस होने के कारण सुरक्षा का खतरा था, इसलिए पुलिस ने जिला प्रशासन की अनुमति लेकर इन ट्रकों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के सुपुर्द कर दिया था। लेकिन यही कदम आरोपियों के लिए चोरी का रास्ता बन गया।
अफसरों की मिलीभगत से गायब की गई 60 टन गैस
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ट्रकों को प्लांट तक पहुंचाने के बाद जानबूझकर उनका वजन नहीं कराया गया। करीब आठ दिनों तक आरोपियों ने खाद्य अधिकारियों के साथ मिलकर गैस को बुलेट टैंकों और निजी टैंकरों में खाली किया। इस दौरान रिकॉर्ड में भारी हेरफेर किया गया। दस्तावेजों के मिलान में पाया गया कि आधिकारिक तौर पर 47 टन गैस खरीदी गई थी, जबकि बाजार में 107 टन गैस बेची गई। यह अंतर साबित करता है कि पकड़ी गई गैस को अवैध तरीके से खपाया गया।
बिना बिल के विभिन्न एजेंसियों को बेची गई एलपीजी
आरोपी पंकज चंद्राकर और विभाग के अधिकारियों ने मिलकर इस सरकारी माल को निजी मुनाफे में बदल दिया। बुलेट टैंकों में भरी गई चोरी की गैस को बिना किसी चालान या बिल के अलग-अलग गैस एजेंसियों को सप्लाई कर दिया गया। पुलिस का मानना है कि इस खेल में कई और स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर्स भी शामिल हो सकते हैं जिनकी भूमिका की जांच चल रही है। जांच टीम ने मौके से डिजिटल साक्ष्य और बही-खाते भी जब्त किए हैं जिनमें इस अवैध लेन-देन का ब्योरा दर्ज है।
फरार आरोपियों की तलाश और पुलिस की अगली रणनीति
इस घोटाले में संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर नाम के दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह मामला केवल डेढ़ करोड़ तक सीमित नहीं हो सकता, जांच के दायरे बढ़ने पर घोटाले की रकम और बढ़ सकती है। पकड़े गए अधिकारियों के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने पूर्व में भी इस तरह की धांधली की है या नहीं।
सिस्टम में सेंध और सुरक्षा पर उठे सवाल
खाद्य विभाग के अधिकारियों की इस गिरफ्तारी ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस विभाग की जिम्मेदारी कालाबाजारी रोकने की थी, उसी के अधिकारी चोरी के मुख्य सूत्रधार निकले। महासमुंद पुलिस अब जब्त किए गए कंप्यूटरों से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गैस चोरी का यह नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला हुआ था। फिलहाल, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
इस पूरे प्रकरण की कानूनी प्रक्रिया को समझने के लिए संबंधित धाराओं का विवरण नीचे दिया गया है:
प्रमुख साक्ष्य और जब्ती:
- 4 बड़े बुलेट टैंक और 7 टैंकर सीज।
- हजारों लीटर गैस का स्टॉक रिकॉर्ड में गायब।
- अधिकारियों के मोबाइल से मिली व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड।



