
छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए सरकारी कामकाज अब और भी आसान होने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के आधुनिक संस्करण ‘सेवा सेतु’ पोर्टल का भव्य शुभारंभ किया. चिप्स (CHiPS) द्वारा तैयार किए गए इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य आम जनता तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को पारदर्शी और डिजिटल बनाना है. अब प्रदेशवासियों को आय, जाति या निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए दफ्तरों की दौड़ नहीं लगानी होगी. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि आधुनिक तकनीक के समावेश से नागरिक सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है ताकि हर व्यक्ति का काम समय पर और बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके.
एक ही छत के नीचे 441 सेवाएं, वन स्टॉप सॉल्यूशन बना पोर्टल
‘सेवा सेतु’ पोर्टल को एक सशक्त “वन स्टॉप सॉल्यूशन” के रूप में विकसित किया गया है, जहां नागरिक 30 से अधिक विभागों की 441 सेवाओं का लाभ एक साथ उठा सकेंगे. इसमें 54 नई सेवाओं को जोड़ा गया है, जबकि 329 सेवाओं को री-डायरेक्ट मोड में रखा गया है. गौरतलब है कि जुलाई 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-सेवाओं के मामले में छत्तीसगढ़ का स्थान देश में 27वां था, जिसे सुधारने की दिशा में यह पोर्टल एक मील का पत्थर साबित होगा. अब तक इस सिस्टम के जरिए 3.2 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और जरूरत को दर्शाता है.
व्हाट्सएप के जरिए होगा आवेदन, एआई और भाषिणी तकनीक का कमाल
इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत इसका व्हाट्सएप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ एकीकरण है. अब नागरिक व्हाट्सएप के जरिए न केवल आवेदन कर सकेंगे, बल्कि अपने आवेदन की स्थिति (Status) जान सकेंगे और डिजिटल प्रमाण-पत्र भी प्राप्त कर पाएंगे. इसके साथ ही ‘भाषिणी’ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा. भाषा की बाधा खत्म होने से अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी अपनी मातृभाषा में सुविधाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे. यह कदम डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने की दिशा में काफी अहम माना जा रहा है.
ई-केवाईसी और डिजी लॉकर से मिली सुरक्षा की गारंटी
सुरक्षा और सरलता को ध्यान में रखते हुए सेवा सेतु पोर्टल को आधार आधारित ई-केवाईसी और डिजी लॉकर (DigiLocker) जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है. नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रख सकेंगे और ऑनलाइन भुगतान के लिए इसमें ट्रेजरी और ई-चालान की सुविधा भी एकीकृत की गई है. इससे भुगतान के तुरंत बाद नागरिक डिजिटल रसीद प्राप्त कर सकेंगे. उमंग और ई-प्रमाण जैसी सुविधाओं के जुड़ने से अब आवेदन की प्रक्रिया में जालसाजी की गुंजाइश खत्म हो गई है और पूरा सिस्टम अधिक सुरक्षित हो गया है.
तय समय पर नहीं हुआ काम तो खुद दर्ज होगी शिकायत
प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए पोर्टल में कई कड़े फीचर्स जोड़े गए हैं. लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत यदि कोई अधिकारी तय समय-सीमा में सेवा प्रदान नहीं करता है, तो सिस्टम में ऑटोमेटिक पेनल्टी कैलकुलेशन और स्वतः शिकायत पंजीकरण (Auto Complaint Registration) की व्यवस्था की गई है. पोर्टल पर रीयल-टाइम डैशबोर्ड और एमआईएस रिपोर्टिंग के जरिए वरिष्ठ अधिकारी हर आवेदन की प्रगति देख सकेंगे. इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी कर्मचारियों की जनता के प्रति जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी.
डिजिटल हस्ताक्षर और क्यूआर कोड से सत्यापन हुआ आसान
नए पोर्टल पर जारी होने वाले सभी प्रमाण-पत्र डिजिटल हस्ताक्षर युक्त होंगे और इनमें क्यूआर कोड (QR Code) की सुविधा दी गई है. इससे किसी भी विभाग के लिए प्रमाण-पत्रों का सत्यापन करना बेहद आसान हो जाएगा. मुख्यमंत्री के साथ इस लोकार्पण कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद थे. सरकार का मानना है कि इस डिजिटल क्रांति से छत्तीसगढ़ के नागरिकों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी और शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचेगा.



