
Avalokiteshvara Bronze: विश्व संग्रहालय दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक बेहद गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। राजधानी रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से दशकों पहले चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की अत्यंत दुर्लभ और बहुमूल्य कांस्य (कांसा) प्रतिमा जल्द ही छत्तीसगढ़ लौटने वाली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 19 करोड़ रुपये मूल्य की आंकी गई यह ऐतिहासिक धरोहर वर्तमान में अमेरिका से भारत लाई जा रही है। इस अमूल्य प्रतिमा को वापस अपने राज्य में सहेजने और स्थापित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़े स्तर पर प्रशासनिक और कूटनीतिक औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं।
सिरपुर की बौद्ध कालीन शिल्पकला और प्राचीन गौरव का जीवंत प्रतीक है यह मूर्ति
यह दुर्लभ प्रतिमा छत्तीसगढ़ की समृद्ध बौद्ध परंपरा, प्राचीन मूर्तिकला और महासमुंद जिले के विश्वविख्यात पुरातात्विक स्थल सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान का सबसे बड़ा प्रमाण है। पुरातत्वविदों का मानना है कि इस मूर्ति की वापसी से न केवल प्रदेश की खोई हुई प्राचीन विरासत दोबारा बहाल होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर सिरपुर के ऐतिहासिक महत्व को एक नई प्रतिष्ठा मिलेगी। यह मूर्ति छत्तीसगढ़ के उस सुनहरे दौर की याद दिलाती है जब सिरपुर बौद्ध धर्म और शिक्षा का एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय केंद्र हुआ करता था।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने केंद्र को लिखा पत्र, मूर्ति लेने खुद जाएंगे दिल्ली
छत्तीसगढ़ के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि दिल्ली आगमन के तुरंत बाद इस प्रतिमा को छत्तीसगढ़ को सौंप दिया जाए। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि वे इस ऐतिहासिक प्रतिमा की आधिकारिक रिसीविंग लेने और इसे ससम्मान रायपुर लाने के लिए खुद दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि कागजी कार्रवाई में कोई देरी न हो।
साल 1939 में सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर के पास मिली थी प्रतिमा, खुदा है विशेष शिलालेख
इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह प्राचीन प्रतिमा वर्ष 1939 में सिरपुर स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास उत्खनन के दौरान प्राप्त हुई थी। इस मूर्ति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर प्राचीन लिपि में एक शिलालेख अंकित है। इस शिलालेख में ‘द्रौणग्रिदत्त’ नाम के एक व्यक्ति का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जो प्राचीन श्रीपुर (जिसे आज हम सिरपुर कहते हैं) का मूल निवासी था। रायपुर के संग्रहालय में रखे होने के दौरान तस्करों ने इसे गायब कर दिया था, जिसके बाद यह अवैध रास्तों से होते हुए सात समंदर पार अमेरिका के बाजार में पहुंच गई थी।
अमेरिका ने भारत को सौंपी हैं 657 कलाकृतियां, उसी बड़ी खेप का हिस्सा है छत्तीसगढ़ की धरोहर
इस प्रतिमा की घर वापसी का रास्ता तब साफ हुआ जब अमेरिकी सरकार ने हाल ही में भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन और चोरी की गई कलाकृतियां आधिकारिक रूप से वापस कीं। भारत सरकार को सौंपी गई इसी बड़ी खेप के भीतर छत्तीसगढ़ की यह अमूल्य अवलोकितेश्वर प्रतिमा भी सुरक्षित शामिल है। केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने इस मूर्ति की पहचान स्थापित होने के बाद छत्तीसगढ़ शासन को इसकी सूचना दी, जिसके बाद राज्य का पुरातत्व विभाग इसे वापस लाने के लिए सतर्क हो गया है।
रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय में दोबारा होगी स्थापित, इतिहास प्रेमियों को मिलेगा मौका
भारत भूमि पर कदम रखने के तुरंत बाद राज्य सरकार इस प्रतिमा को कड़ी सुरक्षा के बीच रायपुर लाने की प्रक्रिया को तेजी से अमलीजामा पहनाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस 19 करोड़ की प्रतिमा को वापस रायपुर के राजभवन रोड स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय की विशेष वीआईपी दीर्घा (गैलरी) में पूरी सुरक्षा के साथ पुनर्स्थापित किया जाएगा। इसके बाद इसे छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों, शोधार्थियों, इतिहासकारों और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अवलोकन व अध्ययन के लिए हमेशा के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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