
CG Board Exam: छत्तीसगढ़ में चल रही आठवीं बोर्ड की परीक्षाओं में शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। अभनपुर और धरसींवा विकासखंड में परीक्षा के दौरान जो हुआ, उसने विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। परीक्षा केंद्रों पर तैनात अधिकारियों की अनदेखी के चलते धरसींवा विकासखंड के छात्र-छात्राओं को अभनपुर विकासखंड का प्रश्नपत्र वितरित कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि पूरी परीक्षा खत्म हो गई, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या पर्यवेक्षक को इस अदला-बदली की भनक तक नहीं लगी।
प्रश्नपत्रों के कोड और क्रमांक में गड़बड़ी
नियमों के मुताबिक, बोर्ड परीक्षाओं में हर विकासखंड (ब्लॉक) के लिए अलग-अलग कोड और क्रमांक वाले प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। परीक्षा केंद्रों पर पेपर बांटने से पहले इन कोड्स का मिलान करना अनिवार्य होता है ताकि सही क्षेत्र के बच्चों को सही पेपर मिले। हालांकि, धरसींवा और अभनपुर के मामले में इस प्रोटोकॉल को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। चर्चा है कि प्रश्नपत्रों की कमी के कारण आनन-फानन में दूसरे ब्लॉक के पेपर मंगवाए गए और बिना जांचे ही उन्हें बच्चों के बीच बांट दिया गया।
सप्लाई चेन और वितरण प्रोटोकॉल का हुआ उल्लंघन
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई सामान्य गलती नहीं बल्कि ‘सिस्टम फेलियर’ का बड़ा उदाहरण है। प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर उनके वितरण तक एक कड़ी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया होती है। यदि सप्लाई के समय तय नियमों का पालन किया गया होता, तो एक ब्लॉक का पेपर दूसरे ब्लॉक तक पहुंचना मुमकिन नहीं था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी गलतियों से न केवल परीक्षा की गोपनीयता भंग होती है, बल्कि बच्चों के मूल्यांकन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सवाल तो पूछे, पर उत्तर लिखने के लिए जगह नहीं दी
विभाग की लापरवाही केवल पेपर की अदला-बदली तक सीमित नहीं रही। आठवीं बोर्ड के प्रश्नपत्रों के स्वरूप को लेकर भी छात्रों ने काफी परेशानी झेली। कई प्रश्नपत्रों में ऐसे सवाल शामिल थे जिनके जवाब लिखने के लिए पेपर में जगह ही नहीं छोड़ी गई थी। उदाहरण के तौर पर, प्रश्न क्रमांक 17 में 10 अंकों का एक बड़ा सवाल पूछा गया था जिसमें ‘अथवा’ का विकल्प भी दिया गया था। लेकिन विडंबना देखिए कि दोनों ही विकल्पों के उत्तर लिखने के लिए कोई निर्धारित स्थान नहीं दिया गया, जिससे छात्र परीक्षा के दौरान असमंजस में रहे।
अधूरे सिलेबस और त्रुटिपूर्ण पेपर से छात्र परेशान
इस साल की बोर्ड परीक्षाओं में गड़बड़ियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। परीक्षा सत्र शुरू होने के बाद से ही कभी सिलेबस के बाहर के सवाल, तो कभी कटे-फटे और अस्पष्ट प्रश्नपत्रों की शिकायतें आम हो गई हैं। शिक्षकों का कहना है कि प्रश्नपत्रों में वर्तनी की अशुद्धियां और तकनीकी कमियां इतनी ज्यादा हैं कि छात्रों का ध्यान भटक जाता है। सीमित जगह में बड़े उत्तर समेटने की मजबूरी के कारण कई मेधावी छात्रों के प्रदर्शन पर भी असर पड़ा है।
जवाबदेही तय करने में सुस्त पड़ रहा प्रशासन
परीक्षा प्रबंधन में बार-बार हो रही इन खामियों के बावजूद अब तक विभाग ने किसी भी बड़े अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इससे पहले भी प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे, जिन्हें केवल ‘मानवीय भूल’ बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अभिभावकों और शिक्षकों की मांग है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील विषय में ऐसी लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। फिलहाल, इस नई चूक के बाद प्रशासन जांच की बात कह रहा है, लेकिन छात्रों का भविष्य अब भी अधर में नजर आ रहा है।



