
Bhilai MLA Devendra Yadav Case: विधायक देवेंद्र यादव केस में एक नया मोड़ सामने आया है। विधानसभा चुनाव के दौरान चर्चा में आए कथित वायरल सेक्स वीडियो मामले में भिलाई से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव शनिवार 11 अप्रैल 2026 को पुलिस थाने पहुंचे। उन्होंने अपनी ओर से फोटो और वीडियो के नमूने (सैंपल्स) जांच अधिकारियों को सौंपे। पुलिस ने इन सैंपल्स को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है ताकि फॉरेंसिक जांच के जरिए वायरल वीडियो की वास्तविकता का पता लगाया जा सके। विधायक के इस कदम के बाद अब बंद पड़ी जांच की प्रक्रिया फिर से आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
2023 के चुनाव के दौरान उछला था विवाद
यह पूरा विवाद साल 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के समय शुरू हुआ था। उस वक्त सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक वीडियो जमकर वायरल हुआ था जिसमें एक युवक और महिला को देखा गया था। भारतीय जनता पार्टी ने उस दौरान दावा किया था कि वीडियो में दिखने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि देवेंद्र यादव हैं। हालांकि कांग्रेस विधायक ने शुरू से ही इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए विरोधियों द्वारा रची गई एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
खुद की शिकायत पर जांच में देरी से नाराज दिखे विधायक
मीडिया से बातचीत करते हुए देवेंद्र यादव ने याद दिलाया कि इस वीडियो के सामने आने के बाद उन्होंने खुद ही पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि वे खुद इस मामले में शिकायतकर्ता हैं लेकिन पुलिस की जांच की सुस्त रफ्तार समझ से परे है। विधायक के मुताबिक उन्होंने खुद जांच की मांग की थी ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इतने महीनों बाद भी जांच पूरी न होना और दोषियों तक न पहुंच पाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
पुलिस नोटिस की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
देवेंद्र यादव ने पुलिस द्वारा भेजे गए नोटिस की टाइमिंग पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उन्हें 6 अप्रैल को सुबह 11 बजे उपस्थित होने के लिए जो नोटिस दिया गया वह उन्हें उसी दिन दोपहर 1 बजे के आसपास प्राप्त हुआ। विधायक ने सवाल किया कि जब वे खुद इस मामले में न्याय चाहते हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं तो ऐसी औपचारिकताओं में देरी का क्या मतलब है। उन्होंने इसे प्रशासनिक चूक बताते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें नोटिस की जरूरत नहीं है क्योंकि वे खुद सच्चाई सामने लाना चाहते हैं।
वीडियो को बताया मॉर्फ्ड और उच्च स्तरीय जांच की मांग
विधायक देवेंद्र यादव का दावा है कि वायरल वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और तकनीक की मदद से उसमें छेड़छाड़ (मॉर्फिंग) की गई है। उन्होंने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किसी बड़ी एजेंसी से जांच कराई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह अन्य बड़े प्रकरणों में सीबीआई जैसी एजेंसियां सक्रिय होती हैं वैसी ही गंभीरता यहां भी दिखाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस भ्रम की स्थिति को खत्म करना जरूरी है ताकि जनता के बीच उनकी छवि पर लगा दाग हट सके।
साजिशकर्ताओं को बेनकाब करने की अपील
विधायक ने उम्मीद जताई है कि पुलिस को सौंपे गए उनके असली सैंपल्स की तुलना जब वायरल वीडियो से होगी तो हकीकत सामने आ जाएगी। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि केवल वीडियो की सच्चाई बताना काफी नहीं है बल्कि उन लोगों को भी पकड़ा जाना चाहिए जिन्होंने इस फर्जी वीडियो को फैलाया था। देवेंद्र यादव का कहना है कि चरित्र हनन की इस राजनीति पर लगाम तभी लगेगी जब साजिश रचने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने उनके सैंपल्स को सुरक्षित रख लिया है और आगे की जांच जारी है।



