
रायपुर: छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने धान खरीदी की व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश के किसानों के लिए अब धान बेचने के लिए ऑनलाइन टोकन प्राप्त करने की सुविधा बंद कर दी गई है। नए फैसले के मुताबिक, अब किसानों को टोकन के लिए सीधे अपनी नजदीकी सहकारी समिति या उपार्जन केंद्र पर जाना होगा। सरकार ने यह कदम प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने और जमीनी स्तर पर टोकन वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिए उठाया है। अब किसान अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्र पहुंचकर अपनी बारी की तारीख तय करा सकेंगे।
2,740 केंद्रों पर डिजिटल निगरानी में खरीदी
प्रदेशभर में वर्तमान में 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के जरिए खरीदी का काम चल रहा है। ऑनलाइन टोकन बंद होने के बावजूद पूरी खरीदी प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि खरीदी पूरी तरह पारदर्शी रहे और इसका सीधा फायदा केवल असली किसानों को ही मिले। बिचौलियों और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त इंतजाम किए हैं। समितियों से सीधे टोकन जारी होने से अब किसानों को तकनीकी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे अपनी सुविधानुसार बिक्री की तारीख चुन सकेंगे।
93 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा की हुई आवक
छत्तीसगढ़ में इस सीजन में धान खरीदी के आंकड़े रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रहे हैं। अब तक प्रदेश के करीब 16.95 लाख पंजीकृत किसानों से 93.12 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। सरकार ने समर्थन मूल्य (MSP) के तहत किसानों को भुगतान करने में भी तेजी दिखाई है। अब तक 20 हजार 753 करोड़ रुपये की विशाल राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती आई है और किसानों को उनकी उपज का सही दाम समय पर मिल रहा है।
जिलों में महासमुंद और बेमेतरा सबसे आगे
धान खरीदी के जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में किसानों का भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। 8 जनवरी तक की रिपोर्ट के अनुसार महासमुंद जिले में सबसे अधिक 6.33 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई है। वहीं बेमेतरा, बलौदाबाजार-भाठापारा और बालोद जैसे जिलों में भी खरीदी का आंकड़ा 5 लाख क्विंटल के करीब या उससे पार पहुंच गया है। बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरदराज के जिलों में भी उपार्जन केंद्रों पर धान की आवक लगातार बनी हुई है।
प्रमुख जिलों में धान खरीदी की स्थिति (क्विंटल में):
- महासमुंद: 6,33,291
- बेमेतरा: 5,33,482
- बलौदाबाजार: 5,15,071
- रायपुर: 4,66,249
- धमतरी: 4,43,308
पारदर्शिता और बिचौलियों पर लगाम की कोशिश
सरकार के इस नए निर्णय का मुख्य उद्देश्य धान खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि ऑफलाइन टोकन से स्थानीय स्तर पर किसानों और समिति प्रबंधकों के बीच बेहतर समन्वय होगा। इससे उन किसानों को अधिक लाभ होगा जो तकनीकी रूप से बहुत जागरूक नहीं हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि टोकन वितरण के दौरान किसी भी तरह की धांधली न हो और छोटे व सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर अपनी फसल बेचने का मौका मिले।
| जिला | धान खरीदी (क्विंटल में) | जिला | धान खरीदी (क्विंटल में) |
| महासमुंद | 6,33,291 | बस्तर | 1,79,964 |
| बेमेतरा | 5,33,482 | जशपुर | 1,68,264 |
| बलौदाबाजार-भाठापारा | 5,15,071 | बलरामपुर | 1,57,708 |
| बालोद | 4,99,074 | कोरबा | 1,56,983 |
| रायपुर | 4,66,249 | मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी | 1,41,353 |
| धमतरी | 4,43,308 | गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही | 87,870 |
| राजनांदगांव | 4,42,473 | कोरिया | 76,648 |
| बिलासपुर | 4,21,142 | बीजापुर | 59,583 |
| जांजगीर-चांपा | 4,18,429 | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर | 56,855 |
| कवर्धा | 4,12,003 | सुकमा | 47,617 |
| गरियाबंद | 3,60,612 | नारायणपुर | 24,022 |
| दुर्ग | 3,60,605 | दंतेवाड़ा | 10,238 |
| मुंगेली | 3,58,072 | खैरागढ़-छुईखदान-गंडई | 2,77,071 |
| रायगढ़ | 3,42,528 | सक्ती | 2,70,468 |
| कांकेर | 3,25,960 | सूरजपुर | 2,29,359 |
| सारंगढ़-बिलाईगढ़ | 3,14,758 | सरगुजा | 2,02,951 |
| कोंडागांव | 1,97,106 |



