
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने मंगलवार, 18 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे। इस बैठक में 12 राज्यों के प्रभारी और पीसीसी अध्यक्षों के साथ ‘विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)’ प्रक्रिया की निगरानी के लिए रणनीति तय की गई। इसी बीच, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत भी दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन स्तर पर बड़े बदलावों की संभावना बढ़ गई है।
खरगे, राहुल और वेणुगोपाल की बैठक में हुई थी जिलाध्यक्षों के नामों पर चर्चा
जिलाध्यक्षों के नामों के एलान को लेकर तेज हलचल है। रविवार देर रात दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में छत्तीसगढ़ के जिलाध्यक्षों के नामों पर विस्तार से चर्चा की गई। माना जा रहा है कि दीपक बैज के छत्तीसगढ़ लौटने के बाद कभी भी 41 जिलाध्यक्षों के नाम का आधिकारिक ऐलान हो सकता है।
कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी, कई नए चेहरे होंगे शामिल
कांग्रेस संगठन में इस बार बड़ा फेरबदल होने की संभावना है। सूत्रों की मानें तो 41 जिलाध्यक्षों में से कुछ ही को दोबारा मौका मिल सकता है, जबकि बाकी जिलों में नए चेहरों को सामने लाना तय माना जा रहा है। पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया जा रहा है, ताकि कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा के साथ जोड़ा जा सके।
नव नियुक्त अध्यक्षों के काम की हर छह महीने में होगी समीक्षा
संगठन में जवाबदेही और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है। बताया जा रहा है कि नव नियुक्त जिलाध्यक्षों के काम की हर छह महीने में समीक्षा की जाएगी। यह समीक्षा एक परफॉर्मेंस-बेस्ड सिस्टम पर आधारित होगी। जो अध्यक्ष पार्टी के मानकों पर खरे उतरेंगे, उन्हें ही आगे का कार्यकाल दिया जाएगा। यह कदम संगठन में कार्यक्षमता और गंभीरता सुनिश्चित करेगा।
बैज के रायपुर लौटते ही हो सकता है नामों का ऐलान
कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की दिल्ली से वापसी के बाद ही जिलाध्यक्षों की अंतिम सूची जारी होने की पूरी संभावना है। शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी मिलने के बाद अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। पार्टी के भीतर सभी की निगाहें इस ऐलान पर टिकी हुई हैं, जिससे प्रदेश कांग्रेस के आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक एजेंडे की दिशा तय होगी।



