
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रायपुर में चौपाटी हटाए जाने की असली वजह का खुलासा किया है। मूणत ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि जिस जगह पर चौपाटी का निर्माण किया गया था, वह एजुकेशन हब के लिए आरक्षित थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चौपाटी पूरी तरह से अवैध थी। उन्होंने दावा किया कि जब चौपाटी का निर्माण हो रहा था, तभी भाजपा ने पत्र लिखकर इस पर सवाल खड़े किए थे और धरना प्रदर्शन भी किया था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे अनदेखा कर दिया।

चौपाटी की जगह बननी थी 1000 सीटर लाइब्रेरी
विधायक राजेश मूणत ने स्पष्ट किया कि चौपाटी के लिए उपयोग की गई जमीन असल में खेल विभाग की थी। उस जगह पर स्टेशनरी की दुकानें, कंप्यूटर सेंटर और एक बड़ी लाइब्रेरी खुलनी थी। उन्होंने खुलासा किया कि इस जगह पर 1000 सीट वाली लाइब्रेरी बनाने के लिए पहले ही टेंडर हो चुका था। मूणत ने बताया कि चौपाटी के दुकान संचालकों ने भी नगर निगम के साथ एक समझौता किया था, जो इस बात का प्रमाण है कि यह संरचना स्थायी या कानूनी नहीं थी।
अवैध निर्माण को बढ़ावा देना कांग्रेस की परंपरा: मूणत
राजेश मूणत ने चौपाटी को हटाए जाने के विरोध पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि “अवैध चौपाटी” को बढ़ावा देना कांग्रेस की परंपरा रही है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे रात के 2 बजे उनके घर पर प्रदर्शन करते हैं। मूणत ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या एक जनप्रतिनिधि अपने घर में सो नहीं सकता?” उन्होंने इस प्रदर्शन के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि चौपाटी संचालन करने वालों के साथ कांग्रेसी नेताओं का भी लेनदेन है, जिसके कारण वे विरोध कर रहे हैं।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर यूथ हब की शुरुआत
मूणत ने याद दिलाया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस जगह पर यूथ हब के नाम से यह परियोजना शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि टेंडर होने के समय भी यह जमीन नगर निगम की नहीं थी, बल्कि यह खेल विभाग के अधीन थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि लगभग तीन महीने पहले तक भी जमीन का मालिकाना हक खेल विभाग के पास ही था। इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया, जिसके कारण चौपाटी को हटाया जाना आवश्यक हो गया था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महापौर और एमआईसी सदस्य भी रहे मौजूद
चौपाटी हटाने की असली वजहों का खुलासा करने के लिए बुलाई गई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक राजेश मूणत अकेले नहीं थे। इस दौरान महापौर और एमआईसी (Mayor-in-Council) मेंबर भी उनके साथ मौजूद रहे। यह उपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि चौपाटी को हटाने का फैसला भारतीय जनता पार्टी शासित निगम और नेताओं के बीच सहमति से लिया गया है। उनका मानना है कि शिक्षा के लिए आरक्षित जगह का व्यावसायिक उपयोग गलत था, इसलिए यह कार्रवाई की गई।
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