CG Dial 112 Driver Bharti Fraud: छत्तीसगढ़ में नया फ्रॉड: नौकरी के फर्जी विज्ञापन से छत्तीसगढ़ के युवाओं को ठगने की कोशिश, डायल 112 में ड्राइवर भर्ती का विज्ञापन और तुरंत जॉइनिंग का दावा निकला 100% फर्जी, जानें पूरा मामला

CG Dial 112 Fake Driver Bharti: छत्तीसगढ़ में सरकारी और आपातकालीन सेवाओं में नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगार युवाओं को ठगने के लिए जालसाजों ने एक नया और बेहद हाईटेक तरीका निकाला है। इंटरनेट मीडिया पर इन दिनों प्रदेश की ‘डायल 112’ इमरजेंसी सेवा में ड्राइवरों की बंपर भर्ती को लेकर एक विज्ञापन का पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में दावा किया गया है कि विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर चालकों की नियुक्ति की जा रही है। इस भ्रामक खबर के फैलते ही सैकड़ों युवा नौकरी की आस में दिए गए नंबरों पर संपर्क करने लगे हैं। हालांकि, जब इसकी हकीकत सामने आई तो पता चला कि यह पूरा विज्ञापन पूरी तरह से जाली है और इसके पीछे एक सोची-समझी ठगी की साजिश है।

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वायरल पोस्टर में 13 हजार सैलरी और तुरंत जॉइनिंग का दावा, युवाओं को लुभाने के लिए दी गई ये जानकारियां

जालसाजों ने युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए पोस्टर में कई तरह के लुभावने दावे किए हैं। इस फर्जी भर्ती विज्ञापन के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:

  • वेतन और ड्यूटी: भर्ती होने वाले ड्राइवरों को हर महीने 13 हजार रुपये सैलरी देने और केवल 8 घंटे की ड्यूटी होने की बात कही गई है।
  • उम्र सीमा: आवेदन करने वाले चालकों की आयु सीमा 21 वर्ष से लेकर 40 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है।
  • थाना स्तर पर तैनाती: विज्ञापन में लिखा गया है कि प्रदेश के चिन्हित जिलों के प्रत्येक थाना क्षेत्र में तीन-तीन ड्राइवरों की तत्काल नियुक्ति की जाएगी।
  • सीमित समय: युवाओं पर जल्द से जल्द संपर्क करने का दबाव बनाने के लिए जॉइनिंग की तारीख 17 मई से शुरू होने का दावा किया गया है।

विभाग की दोटूक: डीएसपी विवेक सिंह ने कहा- पुलिस ने नहीं निकाला कोई ऐसा आधिकारिक विज्ञापन

डायल 112 सेवा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रबंधन तक जब इस वायरल विज्ञापन की प्रति पहुंची, तो महकमे में खलबली मच गई। इस मामले पर स्थिति साफ करते हुए डायल 112 के डीएसपी विवेक सिंह ने बताया कि विभाग की तरफ से ऐसी कोई भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से भ्रामक और जाली पोस्टर है, जिसे केवल ग्रामीण और सीधे-साधे बेरोजगार युवाओं को आर्थिक चपत लगाने और उन्हें गुमराह करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है।

वेंडर कंपनी ‘जीवीके’ ने भी झाड़ा पल्ला, कहा- सोशल मीडिया पर नहीं दी जाती नौकरी की जानकारी

डायल 112 के वाहनों और उनके स्टाफ का प्रबंधन संभालने वाली अधिकृत वेंडर कंपनी ‘जीवीके’ ने भी इस वायरल हो रहे विज्ञापन को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि उनके द्वारा भविष्य में की जाने वाली किसी भी तकनीकी या गैर-तकनीकी भर्ती के लिए इस तरह के व्हाट्सएप या फेसबुक विज्ञापनों का सहारा नहीं लिया जाता। कंपनी ने आम जनता और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी झांसे में न आएं।

इन 13 जिलों के नाम लेकर रचा गया ठगी का ताना-बाना, अन्य क्षेत्रों के लिए भी किए फर्जी दावे

ठगों ने इस फर्जी विज्ञापन को सच दिखाने के लिए छत्तीसगढ़ के कई अंदरूनी और मैदानी जिलों को निशाना बनाया है। पोस्टर में विशेष रूप से इन क्षेत्रों का जिक्र किया गया है:

  • मुख्य जिले: बालोद, बेमेतरा, धमतरी, कांकेर और कोण्डागांव।
  • बस्तर संभाग के क्षेत्र: बीजापुर और सुकमा जैसे सुदूर जिले।
  • अन्य संभाग के जिले: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर और गरियाबंद।

पोस्टर में यह भी लिख दिया गया है कि इन मुख्य 13 जिलों के अलावा राज्य के बाकी बचे अन्य सभी जिलों में भी पांच-पांच पद खाली हैं, ताकि पूरे प्रदेश के युवाओं को झांसे में लिया जा सके।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर बनाया गया जाली ग्राफिक्स, असली सरकारी लोगो की हुई चोरी

प्रशासनिक जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इस फर्जी पोस्टर को तैयार करने के लिए जालसाजों ने आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक और हाई-एंड ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर का उपयोग किया है। पोस्टर की बनावट और उसके रंग-रूप को हूबहू छत्तीसगढ़ पुलिस के आधिकारिक विज्ञापनों जैसा ही रूप दिया गया है। इसके अलावा ठगों ने विभाग के असली सरकारी लोगो और चिन्हों की चोरी करके इस पोस्टर पर चिपकाया है, ताकि पहली नजर में कोई भी पढ़ा-लिखा युवा इस पर आसानी से भरोसा कर ले और इसे सरकारी आदेश समझ बैठे।

ऐसे पहचानें जालसाजों का झूठ: इन पांच बातों से खुल जाएगी फर्जी भर्ती विज्ञापन की पोल

अगर आपके पास भी सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसा कोई विज्ञापन पहुंचा है, तो आप इन तकनीकी खामियों को देखकर इसकी सत्यता को आसानी से परख सकते हैं:

  • वेबसाइट पर सन्नाटा: पुलिस विभाग या गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर इस भर्ती से संबंधित कोई भी शासकीय नोटिफिकेशन या शुद्धिपत्र मौजूद नहीं है।
  • सरकारी लिंक गायब: पोस्टर में आवेदन करने के लिए किसी भी प्राधिकृत सरकारी पोर्टल की लिंक या विभागीय ईमेल आईडी का उल्लेख नहीं किया गया है।
  • सिर्फ मोबाइल नंबर का खेल: विज्ञापन के नीचे केवल एक अज्ञात मोबाइल नंबर दिया गया है, जो किसी सरकारी दफ्तर का न होकर एक निजी नंबर है।
  • दबाव बनाने की तरकीब: सीमित सीटें और तुरंत नौकरी मिलने की बात कहकर युवाओं से जल्दबाजी में पैसे ऐंठने की कोशिश की जा रही है।

आबकारी और गृह विभाग अलर्ट: अज्ञात ठगों के खिलाफ साइबर सेल में केस दर्ज कराने की तैयारी शुरू

इस गंभीर मामले को देखते हुए डायल 112 के आला अधिकारियों ने पुलिस की साइबर विंग को मामले की जांच सौंप दी है। डीएसपी विवेक सिंह के मुताबिक विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर के आधार पर उसके धारक का लोकेशन और नाम पता लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। साइबर सेल में अज्ञात ठगों के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया जा रहा है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि वे नौकरी के नाम पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति के खाते में एडवांस पैसे ट्रांसफर न करें और न ही फोन पर अपनी बैंक पासबुक या आधार कार्ड जैसी निजी जानकारियां साझा करें।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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