Fuel Price Hike: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी तो सिर्फ झांकी है, असली पिक्चर अभी बाकी है: हर लीटर पर हो रहा ₹39 का घाटा

Fuel Price Hike: भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार साल के लंबे अंतराल के बाद हुई ₹3 की बढ़ोतरी जनता के लिए केवल एक शुरुआती झटका हो सकती है। तेल उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण घरेलू सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ रहा था। हालांकि सरकार ने शुक्रवार को कीमतों में मामूली आंशिक बढ़ोतरी कर राहत देने की कोशिश की है, लेकिन कंपनियां अब भी गहरे घाटे में डूबी हुई हैं।

पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल में उबाल, 100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

ईंधन की कीमतों में आ रही इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में पिछले ढाई महीने से जारी भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य टकराव के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस संकट के कारण कच्चे तेल की कीमत एक समय 130 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक जा पहुंची थी और वर्तमान में भी यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस 50 फीसदी से ज्यादा की तेजी का सीधा असर अब भारतीय तेल बाजार पर दिखने लगा है।

₹3 की बढ़ोतरी के बाद भी नहीं संभला घाटा, डीजल पर ₹39 का नुकसान बरकरार

उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के दामों में जो ₹3 की वृद्धि की गई है, वह तेल कंपनियों के वास्तविक नुकसान के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इस मामूली बढ़ोतरी से पहले कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर ₹14 और डीजल पर ₹42 का घाटा हो रहा था। अब इस आंशिक सुधार के बाद भी तेल कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल बेचने पर ₹11 और सबसे ज्यादा खपत वाले ईंधन डीजल पर ₹39 प्रति लीटर का शुद्ध नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस भारी अंतर को पाटने के लिए आने वाले समय में रिटेल कीमतों को और बढ़ाना पड़ सकता है।

कच्चे तेल का गणित: इंडियन बास्केट का भाव भी 109 डॉलर के पार

वैश्विक कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के रुख से साफ है कि निकट भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद कम है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड 3.35 प्रतिशत की मजबूत उछाल के साथ 109.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ है। भारत जिस कच्चे तेल का आयात करता है, उस ‘इंडियन बास्केट’ के क्रूड का भाव भी इसी के तर्ज पर 109.3 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है। जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 से 80 डॉलर के दायरे में वापस नहीं आतीं, तब तक घरेलू बाजार में दबाव बना रहेगा।

पेट्रोल के निर्यात पर लगा विंडफॉल टैक्स, घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कोशिश

घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और कंपनियां सारा मुनाफा विदेशी बाजारों में निर्यात करके न कमाएं, इसके लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर ₹3 प्रति लीटर का विंडफॉल गेन टैक्स (अप्रत्याशित लाभ कर) लगा दिया है। यह नई व्यवस्था आज यानी 16 मई 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गई है। इस टैक्स को लगाने का मुख्य उद्देश्य युद्ध और वैश्विक संकट के इस दौर में देश के भीतर पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क में कटौती, टैक्स ढांचे में बड़ा फेरबदल

एक तरफ जहां सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर नया टैक्स थोंपा है, वहीं दूसरी तरफ डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगे टैक्स को थोड़ा तर्कसंगत बनाया है। सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को ₹23 प्रति लीटर से घटाकर ₹16.5 प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह हवाई जहाजों के ईंधन यानी एटीएफ पर निर्यात टैक्स को ₹33 प्रति लीटर की भारी दर से घटाकर ₹16 प्रति लीटर तय किया है। सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क और अवसंरचना उपकर फिलहाल शून्य रहेगा।

घरेलू उपभोक्ताओं पर टैक्स का सीधा असर नहीं, लेकिन राहत की उम्मीद कम

वित्त मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में यह भी साफ किया है कि देश के भीतर आम जनता की खपत के लिए स्वीकृत पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा केंद्रीय शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद पहली बार पेट्रोल पर ₹3 प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) लगाया गया है। हालांकि सरकार ने सीधे तौर पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर बोझ नहीं डाला है, लेकिन तेल कंपनियों के ₹39 तक के भारी अंडर-रिकवरी (नुकसान) को देखते हुए आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन महंगे साबित हो सकते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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