धमतरी कांग्रेस में घमासान: नई जिला कार्यकारिणी में जमीनी दिग्गजों की अनदेखी

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कांग्रेस की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और गहरा गई है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के अनुमोदन और जिला अध्यक्ष श्रीमती तारिणी नीलम चंद्राकर की अनुशंसा पर जारी इस सूची ने संगठन में एकता के बजाय असंतोष के स्वर मुखर कर दिए हैं। जारी नियुक्तियों में कुरुद विधानसभा सहित पूरे जिले के उन समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है, जो लंबे समय से जमीन पर पार्टी को सींच रहे थे। सबसे ज्यादा चर्चा कुरुद के कद्दावर चेहरों को लेकर है; हैरानी की बात यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी रहीं लक्ष्मीकांता साहू जैसे स्थापित नेताओं का वर्तमान संगठन में कहीं नामोनिशान नहीं है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि जमीनी नेताओं की इस उपेक्षा से आगामी चुनावों में पार्टी की सक्रियता और वोट बैंक पर विपरीत असर पड़ सकता है।

उपेक्षा का दंश: कुरुद के प्रभावशाली चेहरों को संगठन से किया बाहर

धमतरी जिला कांग्रेस की नई टीम में कुरुद के उन नेताओं को जगह नहीं मिली है, जो वर्षों से पार्टी के लिए पसीना बहा रहे हैं। तपन चंद्राकर, प्रभातराव मेघावाले और शंकर साहू जैसे कद्दावर नाम सूची से गायब हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि चंदना के कृष्ण कुमार साहू, चिंवरी से बसंत साहू और कठौली के फणेन्द्र साहू, भखारा से विनोद साहू, गोबरा के लाकेश्वर साहू, खुरसेंगा से विश्वनाथ साहू, अछोटी से पुरानिक राम साहू, ग्राम चर्रा के भानु बैस, बगदेही से रामचंद साहू, भुसरेंगा वाले देवेन्द्र चंद्राकर, रिसन साहू जैसे समर्पित सिपाहियों की अनदेखी करना पार्टी के भविष्य के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। भखारा से लेकर कठौली तक के इन मजबूत नेताओं की अनुपस्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या जिला कांग्रेस अब केवल कुछ चुनिंदा लोगों की निजी जागीर बनकर रह गई है?

पायलट के सामने हाई वोल्टेज ड्रामा: मंच पर लगे दलाली के आरोप

धमतरी के राजीव भवन में इससे पहले भी गुटबाजी देखने को मिला उस समय स्थिति बेहद असहज हो गई जब ‘संविधान बचाओ’ कार्यक्रम के समापन पर सचिन पायलट बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवेंद्र अजमानी ने जिला अध्यक्ष शरद लोहाना पर सीधे हमला बोल दिया। अजमानी ने महापौर टिकट वितरण में ‘दलाली’ होने के गंभीर और तीखे आरोप लगाए। पायलट जैसे बड़े राष्ट्रीय नेता की मौजूदगी में हुआ यह हंगामा यह बताने के लिए काफी है कि धमतरी कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस घटनाक्रम ने संगठन की एकता के दावों की पूरी तरह पोल खोल दी है।

20 मिनट में निष्कासन: अनुशासन का डंडा या आवाज दबाने की कोशिश?

हंगामे के बाद पार्टी आलाकमान ने बिजली की रफ्तार से कार्रवाई की। घटना के महज 20 मिनट के भीतर ही वरिष्ठ नेता देवेंद्र अजमानी को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि करार दिया है। हालांकि, इस त्वरित कार्रवाई ने कार्यकर्ताओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। कई लोगों का मानना है कि बुनियादी मुद्दों और भ्रष्टाचार के आरोपों पर बात करने के बजाय आवाज दबाने के लिए निष्कासन का रास्ता अपनाया गया है, जिससे गुटबाजी कम होने के बजाय और ज्यादा गहरी हो गई है।

गुटबाजी की पुरानी बीमारी: धमतरी में बंटी हुई है ‘पंजे’ की ताकत

धमतरी कांग्रेस के लिए गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन सचिन पायलट के दौरे के दौरान जिस तरह से विवाद सतह पर आया, उसने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। जिले के प्रभावशाली नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग इतनी पुरानी है कि अब यह कार्यकर्ताओं के बीच भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। भारत नाहर और नीशू चंद्राकर जैसे नेताओं की सक्रियता पर उठते सवाल और पुरानी टीम को हाशिए पर रखना यह संकेत देता है कि जिले में ‘ओल्ड गार्ड’ बनाम ‘न्यू गार्ड’ की लड़ाई अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

भविष्य की चुनौती: नाराज कार्यकर्ताओं को मनाना होगा टेढ़ी खीर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर धमतरी जिला कांग्रेस ने जल्द ही डैमेज कंट्रोल नहीं किया, तो आने वाले चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले साहू समाज और अन्य स्थानीय प्रभावशाली नेताओं की नाराजगी कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। केवल स्वागत-सत्कार और रैलियों से गुटबाजी खत्म नहीं होगी, बल्कि संगठन को समावेशी बनाकर ही बिखराव को रोका जा सकता है। फिलहाल धमतरी की राजनीति में कांग्रेस अपने ही अपनों के बीच घिरती नजर आ रही है।

Also Read: धर्मांतरण विधेयक पर घमासान: अमित जोगी ने जलाई बिल की कॉपी, बोले- ‘आस्था पर पहरा बिठा रही सरकार’

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button