CG Kharif Season: खरीफ सीजन की तैयारी शुरू, किसानों को मिल रहे ऋण, लेकिन खाद वितरण पर फिलहाल लगी रोक, ऋण पाने के लिए इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

Chhattisgarh Kharif Season: छत्तीसगढ़ में मानसून के आने से पहले ही किसान अपने खेतों की तैयारी में जुट गए हैं। राज्य सरकार ने भी किसानों की मदद के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, इस बीच एक बड़ी खबर यह है कि खाद के वितरण पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। वैश्विक स्तर पर खाद की आपूर्ति में आ रहे संकट को देखते हुए प्रशासन अभी फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

किसानों को मिलने लगा खेती के लिए ऋण

सहकारी समितियों ने किसानों को आगामी खरीफ फसल के लिए ऋण जारी करना शुरू कर दिया है। सरकार की कोशिश है कि बोनी से पहले किसानों के पास पर्याप्त नगदी हो ताकि वे बीज और अन्य संसाधनों का इंतजाम कर सकें। नियम के मुताबिक, किसानों को मिलने वाले कुल ऋण का 70 प्रतिशत हिस्सा नगद के रूप में दिया जा रहा है, जबकि बाकी का 30 प्रतिशत हिस्सा वस्तु यानी खाद-बीज के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

खाद वितरण पर अचानक क्यों लगी रोक?

खाद वितरण को लेकर किसान फिलहाल असमंजस में हैं। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों के कच्चे माल की उपलब्धता में कमी आई है, जिसे ‘वैश्विक खाद संकट’ कहा जा रहा है। इसी के मद्देनजर छत्तीसगढ़ शासन ने अभी खाद बांटने पर रोक लगा दी है। शासन स्तर से अभी अंतिम आदेश आना बाकी है। समितियों के प्रबंधकों का कहना है कि जैसे ही उच्च कार्यालय से हरी झंडी मिलेगी, वितरण की प्रक्रिया सुचारू कर दी जाएगी।

एग्रीस्टेक पोर्टल से होगी सटीक मॉनिटरिंग

खाद वितरण में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के लिए इस बार तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। कृषि विभाग एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है जो एग्रीस्टेक पोर्टल (AgriStack Portal) से जुड़ा होगा। पोर्टल पर दर्ज किसान के जमीन के रकबे के आधार पर ही उसे खाद की मात्रा आवंटित की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे वास्तविक किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से उर्वरक मिल सकेगा और गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी।

गोदामों में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद

राहत की बात यह है कि राज्य के पास वर्तमान में खाद का ठीक-ठाक भंडार उपलब्ध है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियों में अभी 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद मौजूद है। इसमें खेती के लिए सबसे जरूरी यूरिया, डीएपी (DAP), एनपीके, एमओपी और एसएसपी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए छत्तीसगढ़ को कुल 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया है, जिसकी आपूर्ति धीरे-धीरे जारी है।

ऋण पाने के लिए इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

जो किसान ऋण लेना चाहते हैं, उन्हें अपनी नजदीकी सहकारी समिति में कुछ अनिवार्य दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना होगा। ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किसानों को निम्नलिखित कागजात तैयार रखने की सलाह दी गई है:

  • बी-1 की नकल और ऋण पुस्तिका
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
  • बैंक पासबुक और चेकबुक
  • आधार कार्ड की प्रति

आदेश के इंतजार में समितियों के चक्कर काट रहे किसान

भले ही ऋण वितरण शुरू हो गया है, लेकिन खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। कई जिलों में किसान रोज समितियों के चक्कर काट रहे हैं ताकि वे अपने स्टॉक का इंतजाम कर सकें। समितियों के प्रबंधकों का कहना है कि बिना सरकारी आदेश के वे एक बोरी खाद भी जारी नहीं कर सकते। किसानों को डर है कि अगर समय पर खाद नहीं मिली, तो उनकी बोनी पिछड़ सकती है।

संभाग स्तरीय बैठक में होगा अंतिम फैसला

खाद वितरण कब से शुरू होगा, इस पर फैसला जल्द ही होने वाली एक संभाग स्तरीय बैठक में लिया जाएगा। इस बैठक में खाद की उपलब्धता और सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग की समीक्षा की जाएगी। कृषि विभाग के जानकारों का कहना है कि सरकार जल्द ही वितरण का शेड्यूल जारी कर सकती है ताकि खेती के पीक सीजन में किसानों को लंबी कतारों में न लगना पड़े। फिलहाल प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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