
माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा के हिंदी प्रश्न पत्र लीक होने की घटना ने पूरी परीक्षा प्रणाली की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इस चूक की वजह से न केवल परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है, बल्कि पूरे साल का अकादमिक कैलेंडर भी गड़बड़ा गया है। मंडल ने अब दोबारा 10 अप्रैल को हिंदी की परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से उन लाखों परीक्षार्थियों के सामने संकट खड़ा हो गया है, जो मुख्य परीक्षाओं के बाद अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटने वाले थे। पहले जहां मई के पहले हफ्ते में नतीजे आने की उम्मीद थी, अब वह समयसीमा आगे खिसकती दिख रही है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर संकट के बादल
हिंदी का पेपर दोबारा होने से सबसे ज्यादा दुविधा गणित, जीव विज्ञान और वाणिज्य संकाय के छात्रों के सामने है। अप्रैल का महीना राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। छात्रों के लिए अब यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि वे जेईई (JEE) और नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं पर ध्यान दें या फिर हिंदी विषय की दोबारा तैयारी करें। मंडल द्वारा साल में दो बार परीक्षा कराने की नई पद्धति लागू करने की कोशिशों को भी इस घटना से तगड़ा झटका लगा है। अब सवाल यह है कि क्या तय समय में परिणाम घोषित हो पाएंगे।
रिजल्ट में देरी से उच्च शिक्षा की राह होगी मुश्किल
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बुरा असर छात्रों के करियर पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो रिजल्ट पहले 10 मई के आसपास आने वाला था, अब उसके जून तक खिंचने की पूरी संभावना है। मेडिकल, इंजीनियरिंग और एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज में दाखिला लेने की योजना बना रहे छात्रों के लिए यह देरी मुसीबत बन सकती है। देरी से आने वाले नतीजों के कारण काउंसलिंग प्रक्रिया और कॉलेज अलॉटमेंट में भी बाधा आ सकती है, जिससे छात्रों का कीमती समय बर्बाद होने का डर है।
टेलीग्राम ग्रुप्स खंगाल रही पुलिस, जांच का दायरा बढ़ा
पेपर लीक मामले में पुलिस की कार्रवाई अब प्रदेश के कई जिलों तक फैल गई है। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और रायगढ़ जैसे शहरों में संदिग्ध विद्यार्थियों से पूछताछ की जा रही है। जांच टीम ने कई छात्रों के मोबाइल जब्त कर उनकी फॉरेंसिक जांच भी की है। हालांकि, बयान लेने के बाद फिलहाल छात्रों को छोड़ दिया गया है, लेकिन पुलिस की मुख्य चुनौती उन लोगों तक पहुँचना है जिन्होंने टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया ग्रुप्स में सबसे पहले प्रश्न पत्र फॉरवर्ड किया था। तकनीकी सेल लगातार डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा कर रही है।
जेईई और नीट के बीच फंसा हिंदी का पेपर
परीक्षा की नई तारीखों ने छात्रों का शेड्यूल पूरी तरह बिगाड़ दिया है। 2 से 8 अप्रैल तक जेईई मेन (JEE Main) की परीक्षाएं होनी हैं, जिसके ठीक बाद 10 अप्रैल को हिंदी का बोर्ड पेपर रख दिया गया है। इसके बाद मई में नीट यूजी और सीयूईटी (CUET) जैसी परीक्षाएं कतार में हैं। ऐसे में जो छात्र तकनीकी विषयों की तैयारी में दिन-रात एक कर रहे थे, उन्हें अचानक से भाषा के पेपर के लिए समय निकालना पड़ रहा है। समय प्रबंधन की यह चुनौती छात्रों के मानसिक दबाव को और बढ़ा रही है।
एक्सपर्ट की राय: तनाव कम करें और मनोबल बढ़ाएं
करियर काउंसलर डॉ. अजीत वरवंडकर का कहना है कि पेपर लीक होना बेहद दुखद है और इसका सीधा असर बच्चों के मनोबल पर पड़ता है। यह समय छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करने का था, लेकिन दोबारा परीक्षा के बोझ ने अनावश्यक तनाव पैदा कर दिया है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे इस कठिन समय में बच्चों को प्रोत्साहित करें। छात्रों को चाहिए कि वे घबराने के बजाय समय का सही प्रबंधन करें और पढ़ाई के बीच-बीच में दिमाग को तरोताजा रखने के लिए छोटे ब्रेक लेते रहें।



