
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस से जुड़ा बड़ा घोटाला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए इस कथित भ्रष्टाचार के मामले में अब एक नया मोड़ आया है। दो साल की लंबी जाँच के बाद विशेष समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है और इसे विधानसभा सचिवालय को सौंप दिया गया है। इस पूरी रिपोर्ट में कई ऐसी जानकारियों के होने का दावा किया जा रहा है जो अब तक जनता के सामने नहीं आई थीं।
सुर्खियों में छत्तीसगढ़ का राशन घोटाला
प्रदेश में गरीबों के राशन से जुड़ा यह मामला काफी समय से सियासी गलियारों में गूँज रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने शुरुआती दौर में इस घोटाले के 600 करोड़ रुपये का होने का आरोप लगाया था। इसके बाद से ही इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच लगातार खींचतान चलती रही है। अब जाँच रिपोर्ट के सामने आने की खबर ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
600 करोड़ की रकम घटकर हुई 216 करोड़
शुरुआत में जिस घोटाले को 600 करोड़ रुपये का बताया जा रहा था, सरकार की ओर से पेश किए गए नए आंकड़ों में वह काफी कम हो गया है। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने विधानसभा में जानकारी दी कि असल में यह गड़बड़ी 216 करोड़ रुपये की है। मंत्री का कहना था कि पहले जो 600 करोड़ का आँकड़ा सामने आया था, वह एक तकनीकी त्रुटि की वजह से था जिसे अब सुधार लिया गया है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गरमाई राजनीति
इस मामले को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक ने कई बार सवाल उठाए थे। सदन में इस पर जमकर बहस हुई जिसके बाद सरकार को इस पूरे प्रकरण की गहराई से जाँच कराने का फैसला लेना पड़ा। इस घोटाले ने न केवल सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए बल्कि शासन की पारदर्शिता को लेकर भी लंबी बहस छेड़ दी थी।
पाँच सदस्यीय विशेष समिति की लंबी पड़ताल
विधानसभा में हुए हंगामे के बाद इस मामले की जाँच के लिए एक विशेष पाँच सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति में संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा के तीन और कांग्रेस के दो विधायकों को जगह दी गई। समिति की कमान पुन्नूलाल मोहले को सौंपी गई थी ताकि निष्पक्ष तरीके से पूरे Chhattisgarh PDS Scam Report के तथ्यों को खंगाला जा सके।
जाँच के दौरान मिले कई गुप्त दस्तावेज
इस समिति ने अपना काम बहुत ही बारीकी से किया और करीब दो साल तक हर छोटे-बड़े पहलू की जाँच की। इस दौरान समिति की कुल 18 बैठकें हुईं जिनमें कई अहम दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। जाँच टीम ने उन अधिकारियों से भी आमने-सामने पूछताछ की जो उस समय इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बताया जा रहा है कि इन बैठकों के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य निकलकर सामने आए हैं।
मानसून सत्र के दौरान सार्वजनिक होगी रिपोर्ट
समिति ने अपनी विस्तृत जाँच पूरी करने के बाद अब अंतिम रिपोर्ट विधानसभा को सौंप दी है। अब सबकी नजरें आने वाले विधानसभा के मानसून सत्र पर टिकी हैं क्योंकि यह रिपोर्ट उसी समय सदन के पटल पर रखी जाएगी। सियासी गलियारों में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता है कि आखिर इस रिपोर्ट में किन बड़े चेहरों और अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं।
पुन्नूलाल मोहले ने विधानसभा को सौंपी फाइल
जाँच समिति के अध्यक्ष पुन्नूलाल मोहले ने पुष्टि की है कि उनकी टीम ने अपना काम पूरी ईमानदारी से खत्म कर लिया है। उन्होंने बताया कि जाँच में जो भी सच्चाई सामने आई है उसे रिपोर्ट में दर्ज कर विधानसभा के सुपुर्द कर दिया गया है। अब यह सरकार पर निर्भर करेगा कि वह रिपोर्ट में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ क्या और कितनी कड़ी कार्रवाई करती है।



