
CBSE New Language Rules: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और दूरगामी बदलाव किया है। बोर्ड ने 9वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक बिल्कुल नई भाषा नीति का एलान किया है। यह नया शैक्षणिक नियम आने वाली 1 जुलाई 2026 से देश भर के सभी सीबीएसई स्कूलों में पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा। इस नई नीति के तहत अब हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं को अपने पाठ्यक्रम में अनिवार्य तौर पर तीन भाषाएं शामिल करनी होंगी। बोर्ड ने साफ किया है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाओं का विशुद्ध रूप से भारतीय होना बेहद जरूरी होगा।
विदेशी भाषाओं के लिए बदला पुराना कॉम्बिनेशन, अंग्रेजी के साथ चुननी होगी एक और क्षेत्रीय भाषा
सीबीएसई के इस कदम से उन छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव आएगा जो अब तक केवल अंग्रेजी और एक अन्य भाषा के भरोसे पढ़ाई कर रहे थे। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश या अन्य कोई विदेशी भाषा सीखने का इच्छुक है, तो वह उसे केवल तीसरी भाषा के विकल्प के रूप में ही रख सकता है। इसके लिए सबसे पहली शर्त यही होगी कि उसकी शुरुआती दो मुख्य भाषाएं अनिवार्य रूप से भारतीय होनी चाहिए। इस बड़े बदलाव के कारण अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब अपनी पुरानी पसंद बदलकर संस्कृत, हिंदी, तमिल, बंगाली या किसी अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषा को मुख्य विषय के रूप में चुनना पड़ेगा।
शुरुआती दौर में 6वीं की किताबों से होगी पढ़ाई, 15 जून तक जारी होगी गाइडलाइन
9वीं कक्षा के स्तर पर इस नई व्यवस्था को अचानक लागू करने में एक व्यावहारिक समस्या यह आ रही है कि वर्तमान में तीसरी भाषा के लिए हाई स्कूल स्तर का नया पाठ्यक्रम तैयार नहीं है। इस अड़चन को दूर करने के लिए बोर्ड ने एक तात्कालिक रास्ता निकाला है। फिलहाल इन नव-चयनित विषयों की बुनियादी पढ़ाई कक्षा 6वीं की पाठ्यपुस्तकों की मदद से कराई जाएगी। बोर्ड प्रशासन इस संबंध में पठन-पाठन के विशेष तौर-तरीकों को लेकर आगामी 15 जून तक एक विस्तृत गाइडलाइन जारी करने जा रहा है। जिन प्रांतीय भाषाओं के लिए एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं होंगी, वहां संबंधित राज्य सरकार के शैक्षणिक संसाधनों की मदद ली जाएगी।
10वीं बोर्ड परीक्षा के मुख्य अंकों में नहीं जुड़ेगा नंबर, इंटरनल असेसमेंट से मिलेगी बड़ी राहत
अतिरिक्त विषय जुड़ने से छात्र-छात्राओं पर पढ़ाई का मानसिक तनाव न बढ़े, इसके लिए बोर्ड ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला भी लिया है। कक्षा 10वीं की मुख्य बोर्ड परीक्षा के दौरान इस तीसरी भाषा के लिए कोई आधिकारिक या लिखित बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इस विषय का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल के स्तर पर ही आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) के जरिए संपन्न होगा। हालांकि छात्र ने इस विषय में कैसा प्रदर्शन किया है, इसका बाकायदा उल्लेख सीबीएसई की तरफ से जारी होने वाले अंतिम सर्टिफिकेट और अंकसूची में किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि तीसरी भाषा में कम नंबर आने या खराब प्रदर्शन के आधार पर किसी भी छात्र को 10वीं की मुख्य बोर्ड परीक्षा में बैठने से वंचित नहीं किया जाएगा।
शिक्षकों की कमी से निपटने के लिए क्लस्टर व्यवस्था, रिटायर्ड टीचरों की भी ली जाएगी मदद
इस नई भाषा नीति को जमीन पर सुचारू रूप से लागू करने में स्कूलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संबंधित भाषाओं के योग्य शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर आ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सीबीएसई ने स्कूल प्रबंधनों को नियमों में कुछ विशेष रियायतें दी हैं। यदि किसी स्कूल में विशिष्ट क्षेत्रीय भाषा के शिक्षक मौजूद नहीं हैं, तो स्कूल प्रबंधन अपने ही परिसर के उन अन्य शिक्षकों की सेवाएं ले सकता है जो उस भाषा को जानने और बोलने में पूरी तरह निपुण हों। इसके अलावा स्कूल अपनी सुविधानुसार अनुभवी रिटायर्ड शिक्षकों की अंशकालिक नियुक्ति कर सकते हैं या फिर ‘सहोदय क्लस्टर्स’ के जरिए आस-पास के दूसरे सीबीएसई स्कूलों के साथ शिक्षक और अन्य शैक्षणिक संसाधन साझा कर सकते हैं।
भाषाई विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में प्रगतिशील कदम, जानिए आम अभिभावकों के मन में उठ रहे सवाल
सीबीएसई का यह ऐतिहासिक निर्णय देश की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को स्कूली स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि शुरुआती दौर में स्कूलों के लिए बुनियादी ढांचे और नए शिक्षकों का प्रबंधन करना थोड़ा कठिन जरूर होगा, लेकिन बोर्ड परीक्षा के दबाव से मुक्त रखकर बोर्ड ने बच्चों के बस्ते का बोझ बढ़ने से रोक लिया है। इस नए बदलाव को लेकर पैरेंट्स और स्टूडेंट्स के मन में कुछ बुनियादी सवाल हैं, जिन्हें नीचे दिए गए विवरण से आसानी से समझा जा सकता है:
- नया भाषा नियम कब से लागू होगा: यह नियम आगामी सत्र में 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह प्रभावी माना जाएगा।
- 9वीं और 10वीं में अब कुल कितनी भाषाएं पढ़नी होंगी: छात्रों को कुल तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से दो भारतीय भाषाओं का होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- क्या छात्र अपनी पसंद की विदेशी भाषा चुन सकते हैं: हां, छात्र विदेशी भाषा पढ़ सकते हैं, लेकिन वे इसे केवल तीसरी भाषा के रूप में तभी रख पाएंगे जब उनकी पहली दो भाषाएं भारतीय हों।



