PM Awas Yojana CG: छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई, पात्र महिला का नाम सूची से काटा तो अधिकारी और सचिव को अपनी जेब से देने होंगे 1.20 लाख रुपये

CG PM Awas Yojana Action: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रशासन ने एक अभूतपूर्व और बेहद सख्त कदम उठाया है। ग्राम हेमाबंध की रहने वाली एक बेहद गरीब और पात्र महिला सुनीता कोशले का नाम प्रशासनिक चूक के कारण सरकारी ‘आवास प्लस’ की आधिकारिक सूची से काट दिया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत ने संबंधित जनपद पंचायत के कार्यपालन अधिकारी (CEO) और ग्राम पंचायत सचिव को सीधे तौर पर इस वित्तीय नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

कलेक्टर की हरी झंडी के बाद जारी हुआ फरमान, निजी जेब से देना होगा पूरा पैसा

बेमेतरा कलेक्टर के अंतिम अनुमोदन और सहमति के बाद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इस संबंध में एक लिखित आदेश जारी कर दिया है। इस सरकारी आदेश के तहत दोनों ही दोषी कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पीड़ित महिला हितग्राही को योजना के तहत मिलने वाली कुल 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि का भुगतान अपनी व्यक्तिगत आय यानी अपनी सैलरी से किस्तों के रूप में करेंगे। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में इसे अपनी तरह का पहला और बेहद कड़ा फैसला माना जा रहा है।

हमनाम के फेर में सॉफ्टवेयर से गायब हुआ नाम, जांच में खुली अधिकारियों की पोल

इस पूरे विवाद की शुरुआत तकनीकी और मानवीय लापरवाही के चलते हुई थी। आधिकारिक जांच पड़ताल में यह बात सामने आई कि गांव में सुनीता कोशले नाम की एक अन्य महिला भी रहती थी। समान नाम होने के कारण कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में डेटा एंट्री के दौरान भारी चूक हो गई। अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन किए पात्र सुनीता कोशले के नाम को सॉफ्टवेयर से पूरी तरह विलोपित यानी डिलीट कर दिया और दूसरी महिला का चयन कर लिया। इसके कारण पात्र होने के बावजूद सुनीता पिछले कई महीनों से अपने पक्के मकान के अधिकार से वंचित थीं।

सुशासन तिहार में शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन, शुरू हुई जांच

अपने साथ हुए इस घोर अन्याय और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ सुनीता कोशले ने हार नहीं मानी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ‘सुशासन तिहार’ सहित जिला मुख्यालय के विभिन्न प्रशासनिक मंचों पर बार-बार अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामला जब उच्च अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा, तो जिला पंचायत की एक विशेष टीम को जांच के निर्देश दिए गए। जांच दल ने जब मौके पर जाकर दस्तावेजों का मिलान किया, तो सुनीता की शिकायत शत-प्रतिशत सही पाई गई।

सरकारी कामकाज में लापरवाही पर जवाबदेही तय, प्रशासन ने दिया कड़ा संदेश

जिला पंचायत द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जनकल्याणकारी योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर बरती गई सुस्ती या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी की गलती की वजह से किसी गरीब या जरूरतमंद नागरिक को उसके हक से हाथ धोना पड़ता है, तो उसका पूरा हर्जाना संबंधित विभाग के कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ेगा। इस फैसले से कलेक्टरेट और जिला पंचायत के अन्य विभागों में हड़कंप मच गया है।

भविष्य के लिए नजीर बना बेमेतरा का यह फैसला, अब संभलकर काम करेंगे बाबू

बेमेतरा जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया यह दंडात्मक कदम आने वाले समय में प्रधानमंत्री आवास योजना समेत तमाम सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए एक बड़ी नजीर साबित होगा। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि फाइलों में की गई गड़बड़ी का खामियाजा अब सिर्फ गरीब जनता ही नहीं भुगतेगी, बल्कि एयरकंडीशनर कमरों में बैठकर आदेश जारी करने वाले जिम्मेदार अफसरों की जेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। इस आदेश के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात पंचायत कर्मी अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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