
आरटीई की सीटों में भारी कटौती के हालिया फैसले ने राजनांदगांव जिले समेत पूरे प्रदेश के हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए आरक्षित सीटों में इस बार अप्रत्याशित कमी आई है। राजनांदगांव जिले में जहां पहले 1700 सीटें उपलब्ध थीं, वहां अब यह आंकड़ा सिमटकर केवल 535 रह गया है। दूसरी ओर प्रवेश पाने के लिए अब तक 1800 से ज्यादा आवेदन जमा हो चुके हैं। इसका सीधा मतलब है कि एक सीट पर चार बच्चों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है और कई जरूरतमंद बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ाई से वंचित रह सकते हैं।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने 8 अप्रैल तक शासन से जवाब तलब किया है कि आखिर सीटों में इतनी बड़ी कटौती किस आधार पर की गई। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी स्कूलों के दबाव में आकर नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे आरटीई कानून की मूल भावना प्रभावित हो रही है। अब प्रदेशभर की नजरें कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि हजारों मासूम बच्चों का भविष्य इसी निर्णय से तय होगा।
नियमों में फेरबदल बनी मुख्य वजह
सीटों के घटने के पीछे नियमों में किया गया बदलाव सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। पहले निजी स्कूलों को नर्सरी या पहली कक्षा की कुल क्षमता का 25 प्रतिशत हिस्सा गरीब बच्चों के लिए रखना होता था। राज्य सरकार के नए निर्देशों के तहत प्रवेश को केवल पहली कक्षा तक सीमित कर दिया गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि जिन स्कूलों ने पहले ही अपनी नर्सरी सीटें भर ली थीं, उन्होंने पहली कक्षा में आरटीई के लिए कोई जगह खाली नहीं होने की जानकारी दे दी। इसी तकनीकी पेंच की वजह से जिले के 80 प्रतिशत स्कूलों में सीटें शून्य हो गई हैं।
निजी स्कूलों पर लग रहे मनमानी के आरोप
सीटों की इस कमी के पीछे केवल सरकारी नियम ही नहीं, बल्कि निजी स्कूलों की मनमानी को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। आरोप है कि कई बड़े स्कूल अपनी वास्तविक क्षमता को छिपा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, जिन स्कूलों में एक ही कक्षा के तीन से चार सेक्शन चल रहे हैं, उन्होंने विभाग को केवल एक सेक्शन की जानकारी दी है। इसके अलावा चयनित बच्चों को ड्रेस और कॉपी-किताब जैसी अनिवार्य सुविधाएं न देने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
ऑनलाइन लॉटरी और विभाग की तैयारी
शिक्षा विभाग ने आवेदनों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। तय कार्यक्रम के अनुसार, आरटीई सीटों के लिए ऑनलाइन लॉटरी 13 से 27 अप्रैल के बीच निकाली जाएगी। राजनांदगांव के जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास बघेल के मुताबिक, केंद्र सरकार के नियमों में बच्चों की उम्र 6 से 14 वर्ष तय है। पिछली सरकार ने नर्सरी से पहली तक का खर्च खुद वहन करने का फैसला किया था, जिसमें वर्तमान सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। विभाग अब कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रहा है ताकि प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
गरीब बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान
राजनांदगांव जिले में पिछले साल तक अविभाजित क्षेत्र को मिलाकर करीब 4500 सीटें हुआ करती थीं। अचानक हुई इस कटौती ने उन माता-पिता को बड़ा झटका दिया है जो अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने का सपना देख रहे थे। अगर सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो सैकड़ों मेधावी बच्चे निजी स्कूलों की दहलीज तक नहीं पहुंच पाएंगे। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा के अधिकार का उद्देश्य ही गरीबों को समान अवसर देना है, जिसे वर्तमान स्थितियों में हासिल करना मुश्किल लग रहा है।



