
Bastar Doctor Couple Padma Shri Award: छत्तीसगढ़ के सुदूर और संवेदनशील बस्तर संभाग में स्वास्थ्य क्रांति की अलख जगाने वाले डॉक्टर दंपती डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पदमश्री’ से नवाजा गया है। सोमवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष और गरिमामयी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दंपती को संयुक्त रूप से यह पदक प्रदान किया। बस्तर के बीहड़ों और घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में पिछले साढ़े तीन दशकों से बिना किसी प्रचार के नि:स्वार्थ भाव से आदिवासियों की चिकित्सा सेवा करने के प्रतिफल के रूप में उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है। इस गौरवशाली उपलब्धि से पूरे छत्तीसगढ़ और विशेषकर बस्तर अंचल में हर्ष का माहौल है।
महाराष्ट्र की सुख-सुविधा छोड़ 1990 में पहुंचे थे बारसूर, वनवासी आश्रम से शुरू किया सेवा का सफर
मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा जिले के रहने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी धर्मपत्नी डॉ. सुनीता गोडबोले के इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने किसी बड़े शहर में क्लिनिक खोलकर मोटी कमाई करने के बजाय बस्तर के जनजातीय समाज की सेवा करने का कठिन रास्ता चुना। वे दंतेवाड़ा जिले के अंदरूनी इलाके बारसूर पहुंचे और वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से अपनी चिकित्सकीय यात्रा शुरू की। शुरुआती दौर में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद इस दंपती ने हार नहीं मानी और घने जंगलों के बीच बसे गांवों को ही अपनी कर्मभूमि बना लिया।
बस्तर के गांवों में ‘डॉक्टर भैया-भाभी’ के नाम से हैं मशहूर, मलेरिया और कुष्ठ रोग के खिलाफ जीती जंग
स्थानीय आदिवासी और वनवासी समाज इस डॉक्टर दंपती को किसी भगवान से कम नहीं मानता और पूरा अंचल इन्हें आदरपूर्वक ‘डॉक्टर भैया-भाभी’ के नाम से पुकारता है। पिछले 36 वर्षों के अपने सेवाकाल में इन्होंने बस्तर में पैर पसारने वाली जानलेवा बीमारियों जैसे मलेरिया, कुष्ठ रोग (लेप्रोसी), टीबी और पीलिया के खिलाफ एक व्यापक जमीनी अभियान चलाया। डॉक्टरों की यह जोड़ी केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रही, बल्कि दवाइयों के थैले लेकर खुद पैदल ही नदी-नाले पार करके उन दूरस्थ गांवों तक पहुंची जहां कभी कोई प्रशासनिक अमला भी नहीं पहुंच पाता था।
एक लाख से अधिक आदिवासियों का किया मुफ्त इलाज, नशे के खिलाफ भी जगाई सामाजिक चेतना
इस समर्पित डॉक्टर दंपती ने अपने तीन दशक से अधिक के सफर में अब तक एक लाख से भी अधिक स्थानीय गरीब मरीजों का पूरी तरह से नि:शुल्क और सफल इलाज किया है। इलाज करने के साथ-साथ इन्होंने बस्तर के जनजातीय युवाओं के बीच शिक्षा का उजियारा फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंदरूनी क्षेत्रों में अंधविश्वास को दूर करने, मादक पदार्थों और नशे के चंगुल से आदिवासी युवाओं को बाहर निकालने के लिए इन्होंने गांव-गांव घूमकर कई सामाजिक जागरूकता अभियान चलाए, जिससे हजारों परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताई खुशी, कहा- डॉक्टर दंपती की यह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण
इस बेहद खास मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरे प्रदेशवासियों की तरफ से डॉक्टर दंपती को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बस्तर के सुदूर और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में दशकों तक बिना किसी निजी स्वार्थ के मानव सेवा की अनुपम मिसाल पेश करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को पद्मश्री मिलना पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान बस्तर के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और समर्पण का सच्चा आदर है।



